गम डिज़ीज़ या पीरियोडोंटाइटिस (Periodontitis) एक गंभीर मसूड़ों की बीमारी है जिसमें मसूड़े (Gums) और उन्हें सहारा देने वाली हड्डियां (Jawbone) प्रभावित होती हैं। यदि समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह दांतों के ढीले होने या गिरने का कारण बन सकती है।
मसूड़ों की सूजन और बैक्टीरिया के संक्रमण से यह स्थिति उत्पन्न होती है। यह आमतौर पर प्लीक (Plaque) और टार्टर (Tartar) के जमाव से शुरू होती है और धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है।
Gum Disease / Periodontitis क्या होता है (What is Gum Disease / Periodontitis)
गम डिज़ीज़ दो मुख्य चरणों में होती है:
- जिंजिवाइटिस (Gingivitis) – यह शुरुआती चरण है जिसमें मसूड़े लाल और सूजे हुए हो जाते हैं।
- पीरियोडोंटाइटिस (Periodontitis) – यह गंभीर चरण है। मसूड़े पीछे हटते हैं, हड्डी की संरचना कमजोर होती है और दांत ढीले हो जाते हैं।
Gum Disease / Periodontitis कारण (Causes of Gum Disease / Periodontitis)
गम डिज़ीज़ होने के मुख्य कारण:
- मुँह में बैक्टीरिया का संक्रमण (Bacterial infection)
- खराब ओरल हाइजीन (Poor oral hygiene)
- धूम्रपान और तंबाकू का सेवन (Smoking and tobacco use)
- अनियमित डेंटल चेकअप (Irregular dental check-ups)
- हार्मोनल बदलाव (Hormonal changes, जैसे गर्भावस्था में)
- जीन संबंधी कारण (Genetic factors)
- डायबिटीज़ या अन्य रोग (Diabetes and other systemic diseases)
Gum Disease / Periodontitis के लक्षण (Symptoms of Gum Disease / Periodontitis)
गम डिज़ीज़ के प्रमुख लक्षण:
- मसूड़ों में लालिमा और सूजन (Redness and swelling of gums)
- मसूड़ों से खून आना (Bleeding from gums, विशेषकर ब्रश करते समय)
- मसूड़ों का पीछे हटना (Receding gums)
- दांत ढीले होना या टूटना (Loose or shifting teeth)
- लगातार मुंह से बदबू आना (Persistent bad breath / Halitosis)
- मसूड़ों में दर्द या संवेदनशीलता (Pain or tenderness in gums)
Gum Disease / Periodontitis कैसे पहचाने (How to Identify Gum Disease)
- दांतों के बीच खाने का फंसना (Food stuck between teeth frequently)
- मसूड़े का रंग बदलना (Color change of gums, pale to bright red)
- दांतों के लंबाई में बदलाव (Teeth appearing longer due to gum recession)
- नियमित जांच में डेंटिस्ट द्वारा प्लाक और टार्टर का मिलना
Gum Disease / Periodontitis इलाज (Treatment of Gum Disease / Periodontitis)
गंभीर स्थिति में डेंटिस्ट या ओरल सर्जन के पास जाना जरूरी है। उपचार में शामिल हैं:
- स्केलिंग और रूट प्लानिंग (Scaling and Root Planing) – दांतों की सफाई और बैक्टीरिया हटाना।
- एंटीबायोटिक दवा (Antibiotic therapy) – संक्रमण कम करने के लिए।
- सर्जिकल ट्रीटमेंट (Surgical treatments) – हड्डी और मसूड़ों की मरम्मत।
- दंत प्रत्यारोपण (Dental implants / Bone grafts) – गंभीर हड्डी नुकसान में।
Gum Disease / Periodontitis कैसे रोके उसे (Prevention of Gum Disease)
- दिन में कम से कम दो बार ब्रश करें (Brush twice daily)
- फ्लॉस का नियमित उपयोग (Use dental floss daily)
- चीनी और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें (Reduce sugar and processed foods)
- नियमित डेंटल चेकअप (Regular dental check-ups every 6 months)
- धूम्रपान और तंबाकू से बचें (Avoid smoking and tobacco)
घरेलू उपाय (Home Remedies for Gum Disease)
- नमक पानी से कुल्ला (Saltwater rinse) – सूजन और बैक्टीरिया कम करता है।
- एलोवेरा जेल (Aloe vera gel) – मसूड़ों की सूजन कम करता है।
- नीम के पत्ते (Neem leaves) – एंटीबैक्टीरियल गुण के लिए।
- कोकोनट ऑयल पुलिंग (Coconut oil pulling) – मुँह के बैक्टीरिया को घटाता है।
ध्यान दें: घरेलू उपाय सिर्फ सहायक हैं। गंभीर मामलों में डेंटिस्ट से संपर्क आवश्यक है।
सावधानियाँ (Precautions)
- ब्रश और फ्लॉस का सही तरीका अपनाएं
- हार्ड या चिपचिपे भोजन से सावधान रहें
- नियमित डेंटल सफाई (Professional cleaning)
- अगर मसूड़ों से खून आए तो तुरंत जांच कराएँ
FAQs (Frequently Asked Questions about Gum Disease)
Q1: क्या गम डिज़ीज़ में दांत हमेशा खो जाते हैं?
A: यदि समय पर इलाज कर लिया जाए तो दांत बचाए जा सकते हैं।
Q2: क्या बच्चों में भी गम डिज़ीज़ हो सकती है?
A: हां, खासकर जिंजिवाइटिस बच्चों में आम है।
Q3: क्या गम डिज़ीज़ केवल बड़ों में होती है?
A: नहीं, यह किसी भी उम्र में हो सकती है।
Q4: क्या दांतों को निकालना जरूरी है?
A: केवल गंभीर और इलाज से ठीक न होने वाले मामलों में।
निष्कर्ष (Conclusion)
गम डिज़ीज़ (Periodontitis) गंभीर लेकिन रोकथाम योग्य बीमारी है। समय पर ब्रशिंग, फ्लॉसिंग, नियमित डेंटल चेकअप और संतुलित आहार इसे नियंत्रित करने में मदद करते हैं। घरेलू उपाय सहायक हैं, लेकिन पेशेवर इलाज अनिवार्य है। यदि मसूड़ों से खून आने लगे या दांत ढीले हों, तो तुरंत डेंटिस्ट से मिलें।
