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बच्चों में दाँत निकलने (Teething Disorder) के लक्षण, कारण, तुरंत राहत के उपाय और सावधानियां

बच्चों में दाँत निकलने (Teething Disorder):

छोटे बच्चों के विकास के सफर में दाँत निकलना (Teething) एक बेहद स्वाभाविक लेकिन माता-पिता और बच्चे दोनों के लिए थोड़ा परेशानी भरा समय होता है। आमतौर पर बच्चों के दाँत 6 महीने से लेकर 10 महीने की उम्र के बीच निकलने शुरू होते हैं। इस प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में टीथिंग (Teething) कहा जाता है।

जब नए दाँत मसूड़ों को फाड़कर बाहर आते हैं, तो बच्चों को मसूड़ों में तेज खुजली, दर्द और सूजन का सामना करना पड़ता है। इस असहजता के कारण बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं, रोने लगते हैं और कई बार उन्हें दस्त या हल्का बुखार भी आ जाता है, जिसे कई लोग टीथिंग डिसऑर्डर (Teething Disorder) के रूप में भी देखते हैं। आज के इस लेख में हम जानेंगे कि बच्चों में दाँत निकलने के लक्षण क्या हैं, इस दौरान बच्चों को होने वाले दर्द से तुरंत राहत कैसे दें और कौन सी सावधानियां बरतनी जरूरी हैं।


दाँत निकलने की सही उम्र क्या है? (Teething Age in Babies)

ज्यादातर बच्चों में पहला दाँत 6 महीने की उम्र के आसपास दिखाई देता है, जिसे 'लोअर सेंट्रल इन्साइजर' (नीचे के सामने वाले दाँत) कहते हैं। हालांकि, हर बच्चे का शारीरिक विकास अलग होता है; कुछ बच्चों में यह प्रक्रिया 4 महीने में ही शुरू हो जाती है, तो कुछ में 12 महीने या उसके बाद तक भी पहला दाँत आता है। अमूमन 3 साल की उम्र तक बच्चों के दूध के सभी 20 दाँत निकल आते हैं।


दाँत निकलने के मुख्य लक्षण (Teething Symptoms in Babies)

जब बच्चे का दाँत निकलने वाला होता है, तो करीब 3 से 5 दिन पहले से ही शरीर में ये लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं:

  • मुँह से अत्यधिक लार (Drooling) टपकना: दाँत निकलते समय मसूड़ों की नसें उत्तेजित होती हैं, जिससे मुँह में लार बहुत ज्यादा बनने लगती है।
  • हर चीज को मुँह में डालना और चबाना: मसूड़ों में होने वाली तेज खुजली को शांत करने के लिए बच्चा खिलौने, उंगलियां या जो भी हाथ लगे उसे चबाने की कोशिश करता है।
  • मसूड़ों में सूजन और लाली: जहाँ से दाँत निकलने वाला होता है, वहाँ के मसूड़े सूज जाते हैं और लाल या कड़े महसूस होते हैं।
  • चिड़चिड़ापन और रोना: मसूड़ों में लगातार होने वाले हल्के दर्द के कारण बच्चा बिना बात के रोने और चिढ़ने लगता है।
  • नींद में खलल और कम भूख लगना: दर्द के कारण बच्चा रात में बार-बार जागता है और मसूड़े छूने पर दर्द होने की वजह से दूध पीना या खाना खाना कम कर देता है।
  • गालों का लाल होना या कान खींचना: दाँत का दर्द कई बार कानों और गालों की नसों तक जाता है, जिससे बच्चे अपने कान खींचने या गाल सहलाने लगते हैं।

नोट: टीथिंग के दौरान हल्का शरीर गर्म होना (100°F से कम) आम है, लेकिन अगर बच्चे को तेज बुखार या गंभीर दस्त हैं, तो यह दाँत का नहीं बल्कि किसी इन्फेक्शन का लक्षण हो सकता है।


दाँत के दर्द से तुरंत राहत पाने के घरेलू उपाय (Home Remedies for Teething Pain)

अपने बच्चे को इस असहनीय दर्द और खुजली से आराम दिलाने के लिए आप इन सुरक्षित और प्राकृतिक उपायों को अपना सकते हैं:

  • ठंडी सिकाई (Cold Compress): एक साफ और सूती सूती कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर या थोड़ी देर फ्रिज में रखकर ठंडा कर लें। फिर इस कपड़े से बच्चे के मसूड़ों की हल्की मालिश करें। ठंडक से मसूड़ों की सूजन और दर्द में तुरंत राहत मिलती है।
  • साफ उंगली से मालिश: अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। फिर अपनी उंगली से बच्चे के मसूड़ों पर हल्का दबाव देते हुए धीरे-धीरे रगड़ें। इससे बच्चे को खुजली से बहुत आराम मिलता है।
  • ठंडे फल या सब्जियां: अगर आपका बच्चा ठोस आहार (Solid Food) खाना शुरू कर चुका है, तो आप उसे खीरा, गाजर या सेब का एक बड़ा टुकड़ा फ्रिज में ठंडा करके चूसने या चबाने के लिए दे सकते हैं। (ध्यान रहे कि टुकड़ा इतना बड़ा हो कि बच्चा उसे निगल न सके)।
  • सिलीकॉन टीथर (Silicone Teethers): बाजार में अच्छी क्वालिटी के BPA-मुक्त सिलिकॉन टीथर मिलते हैं। इन्हें थोड़ी देर फ्रिज में ठंडा करके बच्चे को चबाने के लिए दें। जेल वाले टीथर का उपयोग करने से बचें क्योंकि उनके फटने का डर रहता है।
  • स्तनपान (Breastfeeding): इस समय बच्चे को माँ का दूध सबसे ज्यादा आराम और सुरक्षा का अहसास कराता है। स्तनपान कराने से बच्चे का ध्यान दर्द से भटकता है।

टीथिंग के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां (Precautions for Parents)

दाँत निकलते समय बच्चों की इम्युनिटी थोड़ी कमजोर हो जाती है, इसलिए माता-पिता को इन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए:

  • खिलौनों की साफ-सफाई: बच्चा इस दौरान हर चीज मुँह में डालता है, इसलिए उसके आसपास के सभी खिलौने, बिस्तर और कपड़े पूरी तरह साफ और कीटाणुरहित (Sanitized) होने चाहिए ताकि पेट में इन्फेक्शन न हो।
  • लार को साफ करते रहें: मुँह से लगातार लार टपकने के कारण बच्चे की ठुड्डी और गले पर दाने (Rash) हो सकते हैं। इसे हमेशा एक साफ, मुलायम कपड़े से थपथपाकर (Dab) साफ करते रहें।
  • टीथर को फ्रीजर में न रखें: टीथर या खिलौनों को हमेशा फ्रिज (Refrigerator) में ठंडा करें, फ्रीजर में नहीं। बहुत ज्यादा सख्त या जमी हुई चीज बच्चे के नाजुक मसूड़ों को चोट पहुंचा सकती है।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न दें: बच्चे को दर्द कम करने वाली कोई भी एलोपैथिक सिरप, एस्पिरिन या मसूड़ों पर लगाने वाला सुन्न करने वाला जेल (Benzocaine Gels) बिना पीडियाट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) की सलाह के कभी न दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या दाँत निकलने से बच्चों को दस्त (Diarrhea) लगते हैं?
Ans: मेडिकल साइंस के अनुसार दाँत निकलने से सीधे दस्त नहीं होते। असल में, मसूड़ों में खुजली के कारण बच्चे जमीन पर गिरे गंदे खिलौने या वस्तुएं मुँह में डाल लेते हैं, जिससे बैक्टीरिया पेट में चले जाते हैं और दस्त की समस्या होती है।

Q2. क्या बच्चों को टीथिंग के दौरान ग्राइप वॉटर (Gripe Water) देना सुरक्षित है?
Ans: कुछ लोग ग्राइप वॉटर देते हैं, लेकिन डॉक्टर आज के समय में इसे देने की सलाह नहीं देते क्योंकि कई ग्राइप वॉटर में शुगर या अन्य तत्व होते हैं। इसकी जगह ठंडी सिकाई ज्यादा सुरक्षित उपाय है।

Q3. बच्चों के दाँत निकलने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
Ans: अगर आपके बच्चे को 101°F या उससे ज्यादा तेज बुखार हो, लगातार उल्टी या गंभीर दस्त हो रहे हों, या मसूड़ों से खून आ रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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