Fundus Examination (फंडस जांच) एक विशेष नेत्र परीक्षण होता है, जिसमें आंख के अंदर स्थित भागों जैसे रेटिना (Retina), मैक्युला (Macula), ऑप्टिक नर्व (Optic nerve) और रेटिनल रक्त वाहिकाओं (Retinal blood vessels) की जांच की जाती है। यह जांच आंखों की कई गंभीर बीमारियों का शीघ्र पता लगाने में मदद करती है।
Fundus Examination क्या है? (What is Fundus Examination?)
फंडस जांच एक गैर-इनवेसिव (Non-invasive) प्रक्रिया है जिसमें एक विशेष उपकरण जैसे ओप्थैल्मोस्कोप (Ophthalmoscope) या फंडस कैमरा (Fundus Camera) की सहायता से आंख के पिछले हिस्से की गहराई से जांच की जाती है। यह प्रक्रिया रेटिनल और ऑप्टिक नर्व की स्थिति को जानने के लिए बेहद उपयोगी है।
फंडस जांच क्यों की जाती है? (Why is Fundus Examination Done?)
- डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) की जांच के लिए
- ग्लूकोमा (Glaucoma) की पहचान के लिए
- मैक्युलर डिजनरेशन (Macular Degeneration) की निगरानी के लिए
- हाइपरटेंशन से होने वाले रेटिनल डैमेज की जांच के लिए
- ऑप्टिक न्यूराइटिस (Optic Neuritis) या ऑप्टिक एट्रॉफी (Optic Atrophy) की पुष्टि हेतु
- आंखों में फ्लोटर्स, फ्लैशेज़ या धुंधलापन आने पर
- सिरदर्द, चक्कर या न्यूरोलॉजिकल लक्षणों में नेत्र संबंधी कारण की जांच के लिए
फंडस जांच की प्रक्रिया (Fundus Examination Procedure):
-
आई ड्रॉप द्वारा पुतली (Pupil) का फैलाना
- जांच से पहले मरीज की आंखों में विशेष ड्रॉप डाली जाती है जिससे पुतलियाँ फैलती हैं और रेटिना साफ दिखता है।
-
नेत्र परीक्षण
- डायरेक्ट या इंडायरेक्ट ओप्थैल्मोस्कोप के माध्यम से डॉक्टर आंखों का निरीक्षण करता है।
- या फंडस कैमरा से रेटिना की हाई-रेजोल्यूशन इमेज ली जाती है।
-
समय
- पूरी प्रक्रिया में लगभग 10–20 मिनट का समय लगता है।
फंडस टेस्ट की आवश्यकता कब होती है? (When is Fundus Examination Required?)
के लक्षण (Symptoms of Retinal or Optic Nerve Disorders):
- दृष्टि धुंधली होना (Blurred Vision)
- अचानक अंधेरा छा जाना (Sudden Vision Loss)
- रंग देखने में कठिनाई (Color Vision Problems)
- फ्लोटर्स या चमकदार लाइट दिखना (Floaters or Flashes of Light)
- एक आंख से कम देखना (Partial or Total Vision Loss in One Eye)
- सिरदर्द के साथ दृष्टि में बदलाव (Vision changes with Headache)
कैसे पहचाने कि आपको यह जांच करानी चाहिए? (How to Know You Need Fundus Test?)
- यदि आपको डायबिटीज, हाइपरटेंशन या ग्लूकोमा है
- यदि आंखों में बार-बार धुंधलापन आता है
- यदि आपको माइग्रेन या न्यूरोलॉजिकल लक्षण हैं
- यदि आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है
- यदि कोई नेत्र चिकित्सक आपको इस टेस्ट की सलाह दे
फंडस जांच से होने वाले लाभ (Benefits of Fundus Examination):
- रेटिनल बीमारियों की शीघ्र पहचान
- दृष्टि को स्थायी नुकसान से बचाने में मदद
- मधुमेह और उच्च रक्तचाप से आंखों पर प्रभाव की निगरानी
- ऑप्टिक नर्व की स्थिति का आंकलन
- उपचार की सही दिशा तय करना
कैसे रोके आंखों की बीमारियाँ? (How to Prevent Eye Problems):
- नियमित नेत्र परीक्षण करवाएं
- मधुमेह और ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखें
- संतुलित और पोषक आहार लें
- धूम्रपान से बचें
- कंप्यूटर/मोबाइल स्क्रीन से आंखों को समय-समय पर आराम दें
- सनग्लासेस पहनें जब धूप में निकलें
घरेलू उपाय (Home Remedies for Eye Health):
- गाजर और आंवला का जूस
- त्रिफला चूर्ण का सेवन या आंखों की सफाई
- भीगे हुए बादाम और अखरोट रोज खाएं
- रोज़ सुबह आंखों पर ठंडा पानी डालना
- योग में त्राटक और पल्मिंग अभ्यास करें
फंडस जांच से जुड़ी सावधानियाँ (Precautions Related to Fundus Test):
- जांच के बाद कुछ घंटों तक धुंधलापन रह सकता है
- जांच के बाद वाहन चलाने से बचें
- सूरज की रोशनी से बचने के लिए चश्मा पहनें
- आंखों में जलन या दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):
Q1: क्या फंडस टेस्ट दर्दनाक होता है?
नहीं, यह पूरी तरह से सुरक्षित और दर्द रहित प्रक्रिया है।
Q2: क्या यह टेस्ट बच्चों में भी किया जा सकता है?
हाँ, यदि डॉक्टर सलाह दें तो यह बच्चों में भी संभव है।
Q3: टेस्ट के बाद सामान्य गतिविधियों में लौटना संभव है?
जांच के बाद कुछ समय तक आंखों में धुंधलापन रहता है, इसलिए वाहन चलाने से बचें।
Q4: क्या यह टेस्ट हर साल कराना जरूरी है?
यदि आप डायबिटिक, हाइपरटेंशन या 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में आते हैं, तो सालाना जांच उपयोगी होती है।
निष्कर्ष (Conclusion):
Fundus Examination (फंडस जांच) एक आवश्यक नेत्र परीक्षण है जो रेटिना, ऑप्टिक नर्व और आंख के अन्य भीतरी भागों की स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह न केवल आंखों की बीमारियों को पहचानने में मदद करता है, बल्कि समय रहते उपचार शुरू करने का अवसर भी देता है। यदि आप दृष्टि संबंधी किसी भी लक्षण को अनुभव करते हैं या जोखिम समूह में आते हैं, तो यह जांच ज़रूर करवाएं।