बिस्तर गीला करना (Bedwetting) जिसे चिकित्सा भाषा में Nocturnal Enuresis (नोक्टर्नल इन्यूरिसिस) कहा जाता है, बच्चों में एक आम समस्या है। यह समस्या तब होती है जब बच्चा नींद में अपने मूत्र (Urine) पर नियंत्रण नहीं रख पाता और बिस्तर गीला कर देता है। अधिकतर यह समस्या छोटे बच्चों (5 से 12 वर्ष तक) में पाई जाती है, लेकिन कई बार बड़े बच्चों या किशोरों में भी यह समस्या बनी रह सकती है।
बिस्तर गीला करना क्या होता है? (What is Bedwetting?)
बिस्तर गीला करना एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चा नींद के दौरान बार-बार मूत्रत्याग कर देता है। यह कोई गंभीर बीमारी नहीं होती, बल्कि शरीर के विकास, मूत्राशय (Bladder) की क्षमता और मस्तिष्क के नियंत्रण से जुड़ी समस्या होती है।
बिस्तर गीला करने के कारण (Causes of Bedwetting)
- परिवारिक इतिहास (Family history) – माता-पिता में यह समस्या रही हो तो बच्चों में भी हो सकती है।
- मूत्राशय का छोटा आकार (Small bladder size) – बच्चों का मूत्राशय पर्याप्त मात्रा में मूत्र नहीं रोक पाता।
- गहरी नींद (Deep sleep) – बच्चा नींद में मूत्रत्याग की इच्छा महसूस नहीं कर पाता।
- हॉर्मोन की कमी (Hormonal imbalance) – एंटी-डाययूरेटिक हार्मोन (ADH) की कमी के कारण रात में अधिक मूत्र बन सकता है।
- मूत्र मार्ग संक्रमण (Urinary tract infection - UTI) – इससे बार-बार पेशाब लगना और बिस्तर गीला करना हो सकता है।
- तनाव और मानसिक कारण (Stress and psychological reasons) – घर बदलना, स्कूल का दबाव, पारिवारिक तनाव आदि।
- कब्ज (Constipation) – कब्ज होने से मूत्राशय पर दबाव बढ़ सकता है।
बिस्तर गीला करने के लक्षण (Symptoms of Bedwetting)
- नींद में बार-बार बिस्तर गीला करना।
- रात में अधिक मूत्र का बनना।
- दिन में भी बार-बार पेशाब लगना।
- मूत्राशय पूरी तरह खाली न होना।
- बच्चा नींद में पेशाब रोकने में असमर्थ होना।
बिस्तर गीला करने का इलाज (Treatment of Bedwetting)
- व्यवहारिक थेरेपी (Behavioral therapy) – बच्चे को सोने से पहले टॉयलेट भेजना।
- अलार्म थेरेपी (Bedwetting alarm) – ऐसा उपकरण जो पेशाब निकलते ही बच्चे को जगा दे।
- दवाइयाँ (Medications) – डॉक्टर की सलाह पर Desmopressin या अन्य दवाइयाँ दी जा सकती हैं।
- मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counseling) – तनाव और मानसिक कारणों को समझना और दूर करना।
- आहार नियंत्रण (Diet management) – रात में ज्यादा तरल पदार्थ न देना।
बिस्तर गीला करने से बचाव (Prevention of Bedwetting)
- बच्चे को सोने से पहले टॉयलेट जाने की आदत डालें।
- रात में पानी और तरल पदार्थ कम दें।
- दिन में पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं।
- नींद का समय नियमित रखें।
- बच्चों पर डांट-फटकार न करें, उन्हें प्यार और सहारा दें।
घरेलू उपाय (Home Remedies for Bedwetting)
- शहद (Honey) – सोने से पहले एक चम्मच शहद देना।
- दालचीनी (Cinnamon) – इसमें संक्रमण रोकने के गुण होते हैं, इसे आहार में शामिल किया जा सकता है।
- आंवला (Amla) – आंवला पाउडर या जूस उपयोगी होता है।
- सरसों के बीज (Mustard seeds) – रात को गुनगुने पानी के साथ देना।
- अखरोट और किशमिश (Walnuts and Raisins) – नियमित रूप से देने से लाभ हो सकता है।
सावधानियाँ (Precautions for Bedwetting)
- बच्चे को मानसिक तनाव न दें।
- बार-बार बिस्तर गीला करने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
- मूत्र संक्रमण (UTI) या अन्य बीमारी की जांच कराएं।
- बच्चे को शर्मिंदा या डांटे नहीं।
बिस्तर गीला करने को कैसे पहचाने? (How to Identify Bedwetting)
- यदि बच्चा सप्ताह में 2–3 बार बिस्तर गीला करता है।
- यदि यह समस्या 5 साल से अधिक उम्र तक बनी रहती है।
- यदि बच्चा दिन में भी बार-बार पेशाब करता है।
- यदि बिस्तर गीला करने के साथ दर्द, जलन या बुखार हो तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs on Bedwetting)
प्रश्न 1: क्या बिस्तर गीला करना बीमारी है?
उत्तर: नहीं, यह सामान्यतः बच्चों में विकास की प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन लगातार समस्या होने पर इलाज जरूरी है।
प्रश्न 2: किस उम्र तक बिस्तर गीला करना सामान्य है?
उत्तर: 5 साल तक यह सामान्य माना जाता है, लेकिन इसके बाद भी समस्या बनी रहे तो ध्यान देना चाहिए।
प्रश्न 3: क्या यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है?
उत्तर: हाँ, कई मामलों में बच्चे बड़े होने के साथ यह समस्या दूर हो जाती है।
प्रश्न 4: क्या बिस्तर गीला करना तनाव से जुड़ा हो सकता है?
उत्तर: हाँ, मानसिक दबाव या तनाव से भी यह समस्या हो सकती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
बिस्तर गीला करना (Bedwetting) बच्चों में एक आम लेकिन असुविधाजनक समस्या है। यह अधिकतर मामलों में उम्र बढ़ने के साथ अपने आप ठीक हो जाती है। यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहती है या अन्य लक्षणों के साथ दिखाई देती है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। उचित इलाज, घरेलू उपाय और माता-पिता के सहयोग से बच्चे को इस समस्या से बाहर निकाला जा सकता है।
