एंट्रोपियन (Entropion) आंखों से जुड़ी एक चिकित्सीय समस्या है, जिसमें पलकों का किनारा (eyelid margin) अंदर की ओर मुड़ जाता है। इससे पलक की त्वचा और पलकों के बाल (eyelashes) सीधे आंख की सतह यानी कॉर्निया (cornea) और कंजंक्टिवा (conjunctiva) से रगड़ खाने लगते हैं। यह स्थिति आंखों में जलन, दर्द, आंसू आने और संक्रमण जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है। अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह दृष्टि (vision) को भी प्रभावित कर सकती है।
एंट्रोपियन क्या होता है (What is Entropion)
एंट्रोपियन एक नेत्र विकार है जिसमें निचली या ऊपरी पलक की स्थिति असामान्य हो जाती है। सामान्य स्थिति में पलकों को आंख की सुरक्षा करनी चाहिए, लेकिन एंट्रोपियन में पलकों के बाल आंख की सतह पर रगड़ खाते हैं। यह समस्या अधिकतर बुजुर्ग लोगों में पाई जाती है, लेकिन कभी-कभी जन्मजात (congenital) रूप से भी हो सकती है।
एंट्रोपियन के कारण (Causes of Entropion)
एंट्रोपियन कई कारणों से हो सकता है, जिनमें प्रमुख हैं:
- उम्र बढ़ना (Aging) – उम्र बढ़ने के साथ पलक की मांसपेशियां और ऊतक ढीले पड़ जाते हैं।
- आंख की चोट (Eye injury) – आंख या पलक पर चोट लगना।
- संक्रमण (Infection) – ट्रैकोमा (Trachoma) जैसे संक्रमण।
- सर्जरी या जलन (Surgery or burn) – आंख पर हुई सर्जरी या किसी रासायनिक पदार्थ से जलन।
- जन्मजात कारण (Congenital entropion) – कुछ बच्चों में यह जन्म से ही पाया जाता है।
- आंख की जलन और सूजन (Chronic irritation or inflammation) – आंख में लंबे समय तक एलर्जी या सूजन रहना।
एंट्रोपियन के लक्षण (Symptoms of Entropion)
- आंख में लगातार आंसू आना (Excessive tearing)
- आंखों में जलन (Burning sensation)
- आंखों में लालिमा (Redness)
- आंखों में दर्द या असुविधा (Pain or discomfort)
- आंखों में खुजली (Itching)
- आंख में धुंधला दिखना (Blurred vision)
- आंखों में बार-बार संक्रमण (Frequent infections)
- रोशनी के प्रति संवेदनशीलता (Sensitivity to light)
एंट्रोपियन का इलाज (Treatment of Entropion)
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दवाइयों से इलाज (Medication treatment)
- आंखों में चिकनाई बनाए रखने के लिए आर्टिफिशियल टीयर्स (Artificial tears) और ल्यूब्रिकेंट ऑइंटमेंट (Lubricant ointment) का प्रयोग।
- संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स।
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सर्जिकल इलाज (Surgical treatment)
- Eyelid tightening surgery – पलक को सामान्य स्थिति में लाने के लिए सर्जरी।
- Stitches (sutures) – अस्थायी रूप से पलक को सही स्थान पर लाने के लिए।
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गैर-सर्जिकल विकल्प (Non-surgical options)
- टेप या विशेष कॉन्टैक्ट लेंस से पलक को बाहर की ओर खींचना।
एंट्रोपियन को कैसे रोके (Prevention of Entropion)
- आंखों की स्वच्छता बनाए रखें।
- आंखों को चोट और संक्रमण से बचाएं।
- समय-समय पर नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) से आंखों की जांच कराएं।
- आंखों में किसी भी तरह की समस्या को नजरअंदाज न करें।
घरेलू उपाय (Home Remedies for Entropion)
- आंखों में ठंडी पट्टी (cold compress) लगाने से जलन और सूजन कम हो सकती है।
- आंखों को बार-बार पानी से धोएं।
- डॉक्टर द्वारा सुझाए गए ल्यूब्रिकेंट आई ड्रॉप्स का प्रयोग करें।
- धूल, धुआं और तेज रोशनी से आंखों को बचाएं।
सावधानियाँ (Precautions in Entropion)
- आंखों को रगड़ें नहीं।
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी आई ड्रॉप का उपयोग न करें।
- धूप में बाहर जाते समय सनग्लासेस पहनें।
- अगर लगातार जलन या आंसू आ रहे हैं, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।
एंट्रोपियन को कैसे पहचाने (How to Identify Entropion)
- पलक का किनारा स्पष्ट रूप से अंदर की ओर मुड़ा हुआ दिखेगा।
- पलक के बाल आंख की सतह को छूते हुए महसूस होंगे।
- आंखों में लगातार आंसू और लालिमा बनी रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs about Entropion)
प्रश्न 1: क्या एंट्रोपियन खतरनाक है?
हाँ, अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह कॉर्नियल अल्सर और दृष्टि हानि का कारण बन सकता है।
प्रश्न 2: क्या एंट्रोपियन बच्चों में भी हो सकता है?
हाँ, यह जन्मजात (congenital) रूप से बच्चों में भी पाया जा सकता है।
प्रश्न 3: क्या एंट्रोपियन का इलाज केवल सर्जरी से संभव है?
शुरुआती अवस्था में दवाइयों और ल्यूब्रिकेंट से आराम मिल सकता है, लेकिन स्थायी समाधान प्रायः सर्जरी ही है।
प्रश्न 4: क्या यह समस्या बार-बार हो सकती है?
हाँ, कुछ मामलों में सर्जरी के बाद भी यह दोबारा हो सकती है, इसलिए नियमित जांच जरूरी है।
निष्कर्ष (Conclusion)
एंट्रोपियन (Entropion) आंखों की एक गंभीर समस्या है, जिसमें पलक की स्थिति असामान्य होकर आंख को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके लक्षणों को समय रहते पहचानना और विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहद जरूरी है। घरेलू उपाय केवल अस्थायी राहत देते हैं, लेकिन स्थायी इलाज के लिए सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। समय पर इलाज और सावधानियां अपनाकर आंखों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
