Khushveer Choudhary

Enthesitis : कारण, लक्षण, इलाज और बचाव

एन्थेसाइटिस (Enthesitis) एक चिकित्सीय स्थिति है जिसमें टेंडन (Tendon) और लिगामेंट (Ligament) के हड्डी से जुड़ने वाले स्थान (Enthesis) में सूजन हो जाती है। यह समस्या अक्सर आर्थराइटिस (Arthritis), खासकर स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस (Spondyloarthritis) से जुड़ी होती है। इस रोग में दर्द, सूजन और अकड़न देखने को मिलती है, जिससे मरीज को चलने-फिरने और सामान्य कार्यों में कठिनाई होती है।








एन्थेसाइटिस क्या होता है? (What is Enthesitis?)

एन्थेसाइटिस वह स्थिति है जब एन्थेसिस (हड्डी और टेंडन/लिगामेंट का जुड़ाव बिंदु) में सूजन आ जाती है। यह सूजन धीरे-धीरे जोड़ों में दर्द और कठोरता का कारण बनती है। यह बीमारी मुख्यतः एंकायलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस (Ankylosing spondylitis) और सोरियाटिक आर्थराइटिस (Psoriatic arthritis) जैसी बीमारियों से संबंधित होती है।

एन्थेसाइटिस के कारण (Causes of Enthesitis)

  1. ऑटोइम्यून रोग (Autoimmune diseases) – जैसे स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस, सोरियाटिक आर्थराइटिस।
  2. लगातार दबाव या चोट (Repetitive stress or injury) – टेंडन और लिगामेंट पर बार-बार दबाव पड़ना।
  3. इंफेक्शन (Infection) – कभी-कभी बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण से भी सूजन हो सकती है।
  4. जेनेटिक कारण (Genetic factors) – HLA-B27 जीन वाले लोगों में एन्थेसाइटिस होने की संभावना अधिक होती है।
  5. जोड़ों का अत्यधिक उपयोग (Overuse of joints) – खेलकूद या मेहनत वाले कार्य।

एन्थेसाइटिस के लक्षण (Symptoms of Enthesitis)

  • प्रभावित हिस्से में दर्द और सूजन (Pain and swelling)
  • सुबह उठते समय जोड़ों में कठोरता (Joint stiffness)
  • चलने, झुकने या दौड़ने में दर्द
  • एड़ी, घुटना, कूल्हा, कोहनी और कंधे पर सूजन
  • लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने पर दर्द बढ़ना
  • बार-बार थकान और कमजोरी (Fatigue and weakness) महसूस होना

एन्थेसाइटिस का इलाज (Treatment of Enthesitis)

  1. दवाइयाँ (Medications):

    1. एनएसएआईडी (NSAIDs – Nonsteroidal anti-inflammatory drugs) सूजन और दर्द कम करती हैं।
    1. कॉर्टिकोस्टेरॉयड इंजेक्शन (Corticosteroid injection) सूजन कम करने में मददगार।
    1. बायोलॉजिकल थैरेपी (Biological therapy) – गंभीर मामलों में उपयोग।
  2. फिजियोथेरेपी (Physiotherapy):

    1. स्ट्रेचिंग और हल्की एक्सरसाइज से लचीलापन बढ़ता है।
  3. लाइफस्टाइल मैनेजमेंट (Lifestyle management):

    1. संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सही पोस्चर।

एन्थेसाइटिस को कैसे रोके? (Prevention of Enthesitis)

  • नियमित हल्का व्यायाम करें।
  • शरीर के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव न डालें।
  • सही बैठने और खड़े होने की आदत अपनाएँ।
  • वजन नियंत्रित रखें।
  • चोट लगने पर तुरंत सही उपचार करें।

एन्थेसाइटिस के घरेलू उपाय (Home Remedies for Enthesitis)

  • गर्म और ठंडी सिकाई (Hot and cold compress): दर्द और सूजन कम करने में मदद करती है।
  • हल्दी (Turmeric): इसमें मौजूद करक्यूमिन (Curcumin) सूजन कम करता है।
  • अदरक की चाय (Ginger tea): एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से राहत देती है।
  • ओमेगा-3 युक्त भोजन (Omega-3 rich diet): जैसे मछली, अलसी के बीज।
  • हल्की योगासन और स्ट्रेचिंग नियमित करें।

एन्थेसाइटिस में सावधानियाँ (Precautions in Enthesitis)

  • भारी वजन उठाने से बचें।
  • कठोर व्यायाम न करें।
  • अधिक देर तक एक ही स्थिति में न बैठें।
  • ठंडी और नमी वाली जगह से बचें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें।

एन्थेसाइटिस को कैसे पहचाने? (How to Diagnose Enthesitis)

  • डॉक्टर शारीरिक जांच और मेडिकल हिस्ट्री लेते हैं।
  • एमआरआई (MRI) और अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) से सूजन और जोड़ों की स्थिति देखी जाती है।
  • खून की जांच में HLA-B27 जीन टेस्ट किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या एन्थेसाइटिस पूरी तरह ठीक हो सकता है?
उत्तर: यह स्थिति पूरी तरह से ठीक नहीं होती, लेकिन इलाज और जीवनशैली में बदलाव से नियंत्रित की जा सकती है।

प्रश्न 2: एन्थेसाइटिस किन रोगों से जुड़ा है?
उत्तर: यह अधिकतर स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस, सोरियाटिक आर्थराइटिस और रिएक्टिव आर्थराइटिस से जुड़ा होता है।

प्रश्न 3: क्या एन्थेसाइटिस बच्चों में भी हो सकता है?
उत्तर: हाँ, खासकर जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (Juvenile idiopathic arthritis) में बच्चों को भी यह समस्या हो सकती है।

प्रश्न 4: एन्थेसाइटिस का सबसे आम लक्षण कौन सा है?
उत्तर: एड़ी या घुटने के पास लगातार दर्द और सूजन।

निष्कर्ष (Conclusion)

एन्थेसाइटिस (Enthesitis) एक गंभीर स्थिति है जो अक्सर आर्थराइटिस से जुड़ी होती है। इसके कारणों में ऑटोइम्यून रोग, चोट, संक्रमण और जेनेटिक फैक्टर शामिल हैं। समय पर पहचान और उचित इलाज से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। संतुलित आहार, हल्का व्यायाम और सावधानियाँ अपनाकर मरीज अपनी जीवन गुणवत्ता बेहतर बना सकते हैं।


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