Khushveer Choudhary

Gastroparesis: कारण, लक्षण, इलाज और घरेलू उपाय

गैस्ट्रोपेरेसिस (Gastroparesis) एक पाचन संबंधी समस्या है जिसमें पेट का खाली होना सामान्य से धीमा हो जाता है। इस स्थिति में पेट का खाना छोटी आंत (Small intestine) तक पहुँचने में अधिक समय लेता है। इसका सीधा असर पाचन तंत्र, ब्लड शुगर नियंत्रण और पोषण (Nutrition) पर पड़ता है। यह समस्या अक्सर डायबिटीज़ (Diabetes) से जुड़ी होती है लेकिन अन्य कारण भी हो सकते हैं।








गैस्ट्रोपेरेसिस क्या होता है? (What is Gastroparesis?)

गैस्ट्रोपेरेसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट की मांसपेशियों (Stomach muscles) और तंत्रिकाओं (Nerves) का सही तालमेल बिगड़ जाता है। सामान्यतः पेट की मांसपेशियाँ भोजन को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़कर धीरे-धीरे आंतों की ओर भेजती हैं, लेकिन इस रोग में यह प्रक्रिया धीमी या रुक जाती है।

गैस्ट्रोपेरेसिस के कारण (Causes of Gastroparesis)

  • डायबिटीज़ (Diabetes Mellitus) – उच्च शुगर लेवल तंत्रिकाओं को नुकसान पहुँचाता है।
  • सर्जरी (Surgery) – खासकर पेट या इसोफेगस (Esophagus) की सर्जरी के बाद।
  • दवाइयाँ (Medications) – एंटी-डिप्रेशन या दर्द कम करने वाली दवाइयाँ।
  • नर्व डैमेज (Nerve damage) – खासकर वेगस नर्व (Vagus nerve) की समस्या।
  • अन्य रोग (Other diseases) – पार्किंसन डिज़ीज़ (Parkinson’s disease), मल्टीपल स्क्लेरोसिस (Multiple sclerosis), हाइपोथायरॉयडिज़्म (Hypothyroidism)।
  • अज्ञात कारण (Idiopathic Gastroparesis) – जब स्पष्ट कारण नहीं मिल पाता।

गैस्ट्रोपेरेसिस के लक्षण (Symptoms of Gastroparesis)

  • खाने के बाद पेट भारी लगना
  • जी मिचलाना (Nausea) और उल्टी (Vomiting)
  • पेट दर्द या असहजता
  • भूख न लगना
  • जल्दी पेट भरना (Early satiety)
  • वजन कम होना
  • ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव
  • कब्ज (Constipation) या कभी-कभी दस्त (Diarrhea)

गैस्ट्रोपेरेसिस का इलाज (Treatment of Gastroparesis)

  1. दवाइयाँ (Medications)

    1. Prokinetic drugs – पेट की गति बढ़ाने वाली दवाइयाँ (जैसे Metoclopramide, Domperidone)।
    1. Antiemetic drugs – जी मिचलाने और उल्टी रोकने वाली दवाइयाँ।
  2. डाइट मैनेजमेंट (Diet Management)

    1. हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना।
    2. कम मात्रा में बार-बार खाना।
    3. तैलीय और रेशेदार भोजन से बचना।
  3. ब्लड शुगर कंट्रोल (Blood sugar control)

    1. डायबिटीज़ के मरीजों को शुगर लेवल नियंत्रित रखना जरूरी।
  4. सर्जरी (Surgical options)

    1. गंभीर स्थिति में गैस्ट्रिक पेसमेकर (Gastric electrical stimulation) लगाया जा सकता है।

गैस्ट्रोपेरेसिस को कैसे रोके (Prevention of Gastroparesis)

  • डायबिटीज़ कंट्रोल में रखना।
  • स्वस्थ और संतुलित आहार लेना।
  • शराब और धूम्रपान से बचना।
  • भोजन के बाद तुरंत न लेटना, थोड़ी देर चलना।
  • नियमित व्यायाम करना।

गैस्ट्रोपेरेसिस के घरेलू उपाय (Home Remedies for Gastroparesis)

  • अदरक (Ginger) की चाय जी मिचलाने में राहत देती है।
  • पुदीना (Mint) गैस और अपच कम करता है।
  • तरल भोजन (सूप, दलिया, स्मूदी) लेना।
  • बहुत गर्म या बहुत ठंडा भोजन न करें।
  • छोटे-छोटे भोजन दिन में 5-6 बार लेना।

सावधानियाँ (Precautions)

  • भारी, मसालेदार और तैलीय भोजन से परहेज करें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवाइयाँ बंद न करें।
  • अचानक वजन कम होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
  • शुगर लेवल नियमित जांचते रहें।

गैस्ट्रोपेरेसिस को कैसे पहचाने? (How to Diagnose Gastroparesis)

  • गैस्ट्रिक एम्प्टींग टेस्ट (Gastric emptying study) – भोजन को पचाने और खाली होने की गति मापी जाती है।
  • एंडोस्कोपी (Endoscopy) – पेट में कोई रुकावट (Blockage) तो नहीं, इसकी जाँच।
  • अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे – अन्य कारणों को पहचानने के लिए।
  • ब्लड टेस्ट – डायबिटीज़ और थायरॉयड की जांच।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1: क्या गैस्ट्रोपेरेसिस पूरी तरह ठीक हो सकता है?
उत्तर: यह बीमारी अक्सर क्रॉनिक होती है, लेकिन सही डाइट, दवाइयाँ और जीवनशैली बदलाव से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रश्न 2: क्या गैस्ट्रोपेरेसिस खतरनाक है?
उत्तर: हाँ, अगर इलाज न हो तो कुपोषण (Malnutrition), ब्लड शुगर असंतुलन और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

प्रश्न 3: क्या डायबिटीज़ वालों को यह ज्यादा होता है?
उत्तर: हाँ, लंबे समय से डायबिटीज़ वाले मरीजों में गैस्ट्रोपेरेसिस का खतरा अधिक होता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

गैस्ट्रोपेरेसिस (Gastroparesis) एक गंभीर पाचन संबंधी रोग है जो जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। इसे समय रहते पहचानकर सही इलाज, संतुलित आहार और जीवनशैली बदलाव से नियंत्रित किया जा सकता है। डायबिटीज़ वाले मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और नियमित डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।


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