ग्राफ्ट वर्सस होस्ट डिज़ीज़ (GVHD) एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जो अक्सर बोन मैरो ट्रांसप्लांट (Bone marrow transplant) या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (Stem cell transplant) के बाद होती है। इस बीमारी में प्रत्यारोपित (transplanted) कोशिकाएँ प्राप्तकर्ता (host) के शरीर की सामान्य कोशिकाओं को विदेशी मानकर उन पर हमला करना शुरू कर देती हैं। यह प्रतिरक्षा तंत्र (immune system) की प्रतिक्रिया होती है, जो त्वचा, यकृत (liver), आँतों (intestines) और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकती है।
ग्राफ्ट वर्सस होस्ट डिज़ीज़ क्या होता है (What is Graft-versus-Host Disease)
जब किसी व्यक्ति को बोन मैरो या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया जाता है, तो डोनर (donor) की प्रतिरक्षा कोशिकाएँ (immune cells) प्राप्तकर्ता के शरीर में प्रवेश कर जाती हैं। यदि डोनर और रिसीवर का HLA match (Human Leukocyte Antigen match) पूरी तरह नहीं होता, तो ये डोनर कोशिकाएँ शरीर की सामान्य कोशिकाओं को पराया समझकर उन पर हमला करती हैं। यही स्थिति GVHD कहलाती है।
GVHD दो प्रकार की होती है:
- एक्यूट GVHD (Acute GVHD) – प्रत्यारोपण के 100 दिनों के भीतर होती है।
- क्रोनिक GVHD (Chronic GVHD) – 100 दिनों के बाद या लंबे समय तक बनी रहती है।
ग्राफ्ट वर्सस होस्ट डिज़ीज़ कारण (Causes of Graft-versus-Host Disease)
- डोनर और रिसीवर का HLA mismatch
- अलग लिंग (gender mismatch) वाले डोनर-रिसीवर
- बुजुर्ग मरीजों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट
- अनुचित इम्यूनोसप्रेसिव (Immunosuppressive) दवाओं का प्रयोग
- अनुभवहीन डोनर का चयन
ग्राफ्ट वर्सस होस्ट डिज़ीज़ के लक्षण (Symptoms of Graft-versus-Host Disease)
एक्यूट GVHD (Acute GVHD)
- त्वचा पर लाल चकत्ते या रैश (Skin rash)
- खुजली (Itching)
- दस्त और पेट दर्द (Diarrhea and abdominal pain)
- यकृत (Liver) में सूजन और पीलिया (Jaundice)
क्रोनिक GVHD (Chronic GVHD)
- त्वचा का सख्त होना (Skin tightening)
- मुँह में छाले और सूखापन (Mouth ulcers, dryness)
- आँखों में जलन और सूखापन (Eye dryness, irritation)
- फेफड़ों में समस्या (Lung disorder)
- वजन घटना और थकान (Weight loss, fatigue)
ग्राफ्ट वर्सस होस्ट डिज़ीज़ कैसे पहचाने (Diagnosis of Graft-versus-Host Disease)
GVHD की पहचान निम्नलिखित तरीकों से की जाती है:
- शारीरिक जांच (Physical examination) – त्वचा, आँख, मुँह और पेट की जाँच।
- लैब टेस्ट (Laboratory tests) – रक्त जांच, यकृत एंजाइम टेस्ट।
- बायोप्सी (Biopsy) – त्वचा, आंत या यकृत का ऊतक परीक्षण।
- इमेजिंग टेस्ट (Imaging tests) – सीटी स्कैन या एमआरआई, अंग क्षति की पहचान हेतु।
ग्राफ्ट वर्सस होस्ट डिज़ीज़ इलाज (Treatment of Graft-versus-Host Disease)
- इम्यूनोसप्रेसिव दवाएँ (Immunosuppressive drugs) जैसे – साइक्लोस्पोरिन (Cyclosporine), टैक्रोलिमस (Tacrolimus)।
- कॉर्टिकोस्टेरॉयड (Corticosteroids) जैसे – प्रेडनिसोन (Prednisone)।
- बायोलॉजिकल थेरेपी (Biological therapy) – रिटुक्सिमैब (Rituximab), इब्रूटिनिब (Ibrutinib)।
- सपोर्टिव केयर (Supportive care) – त्वचा की नमी बनाए रखना, मुँह और आँख की देखभाल।
- एंटीबायोटिक और एंटीवायरल दवाएँ – संक्रमण से बचाने के लिए।
ग्राफ्ट वर्सस होस्ट डिज़ीज़ कैसे रोके (Prevention of Graft-versus-Host Disease)
- सही HLA मैच वाले डोनर का चयन करना।
- प्रत्यारोपण से पहले इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं का उपयोग।
- नियमित मॉनिटरिंग और शुरुआती लक्षणों पर तुरंत उपचार।
- डोनर-रिसीवर की मेडिकल हिस्ट्री का विश्लेषण।
घरेलू उपाय (Home Remedies for Graft-versus-Host Disease)
GVHD का मुख्य उपचार केवल चिकित्सकीय निगरानी में संभव है, लेकिन कुछ घरेलू उपाय सहायक हो सकते हैं:
- त्वचा की नमी बनाए रखें – नारियल तेल या एलोवेरा जेल का प्रयोग।
- हल्का और सुपाच्य भोजन लें – दलिया, खिचड़ी, दही।
- पर्याप्त पानी पिएं – शरीर को हाइड्रेट रखें।
- आँखों और मुँह की सफाई – कृत्रिम आँसू (Artificial tears) और माउथवॉश का प्रयोग।
- तनाव कम करें – ध्यान (Meditation) और योग।
सावधानियाँ (Precautions in Graft-versus-Host Disease)
- धूप और प्रदूषण से बचें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएँ बंद न करें।
- भीड़भाड़ वाले स्थानों से दूर रहें ताकि संक्रमण न हो।
- पौष्टिक आहार लें और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखें।
- समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप करवाते रहें।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. क्या GVHD जानलेवा हो सकती है?
हाँ, यदि समय पर इलाज न मिले तो यह गंभीर और जानलेवा साबित हो सकती है।
Q2. GVHD कब होती है?
यह अधिकतर बोन मैरो या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद होती है।
Q3. क्या GVHD हमेशा होती है?
नहीं, यह केवल तब होती है जब डोनर और रिसीवर का HLA match पूरी तरह न हो।
Q4. क्या GVHD का इलाज संभव है?
हाँ, दवाओं और सही चिकित्सा पद्धति से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
Q5. क्या घरेलू उपाय GVHD को ठीक कर सकते हैं?
नहीं, लेकिन ये लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
ग्राफ्ट वर्सस होस्ट डिज़ीज़ (Graft-versus-Host Disease) एक जटिल और गंभीर स्थिति है, जो बोन मैरो या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद हो सकती है। इसके लक्षणों को पहचानकर समय पर इलाज करवाना बहुत ज़रूरी है। सही डोनर का चयन, नियमित निगरानी और इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं का प्रयोग इसे नियंत्रित करने में सहायक है। मरीज को अपने खान-पान, जीवनशैली और सावधानियों पर ध्यान देना चाहिए।
