जन्मजात चयापचय त्रुटि (Inborn Errors of Metabolism, IEM) नामक स्थिति एक व्यापक समूह है जिसमें शारीरिक चयापचय (metabolism) प्रक्रियाओं में जीन-आधारित (defect) त्रुटियाँ होती हैं। Archibald Garrod ने इस अवधारणा को पहली बार 1908 में प्रस्तावित किया था।
चयापचय का अर्थ है—शरीर में ऐसे जैव‑रासायनिक (biochemical) क्रियाक्रम जिनके द्वारा भोजन में पाए गए पोषक तत्त्व टूटते हैं, ऊर्जा बनती है या अन्य आवश्यक यौगिक बने जाते हैं।
जब किसी एंजाइम, ट्रांसपोर्ट प्रोटीन या को‑फैक्टर (सहायक पदार्थ) में दोष हो जाता है, तो उस चयापचय पथ (metabolic pathway) में अवरोध उत्पन्न होता है; परिणामस्वरूप विषैले (toxic) पदार्थ जमा हो सकते हैं या आवश्यक यौगिक बनाने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
ये विकार अलग‑अलग प्रकार के हो सकते हैं—कार्बोहाइड्रेट, अमीनो एसिड, वसा (लिपिड) चयापचय या अन्य उपप्रकार।
IEM जितने दुर्लभ हैं, लेकिन अगर सामूहिक रूप से देखा जाए तो इनकी संख्या कम नहीं है।
इस ब्लॉग में हम विस्तार से चर्चा करेंगे—क्या होता है, कारण, लक्षण, कैसे पहचाने, इलाज, कैसे रोके, घरेलू उपाय, सावधानियाँ, FAQ और निष्कर्ष।
Inborn Errors of Metabolism क्या होता है? (What happens?)
जब जन्मजात चयापचय त्रुटि होती है, तो शरीर के अंदर निम्नलिखित प्रमुख बातें हो सकती हैं:
- चयापचय के किसी पथ (metabolic pathway) में एंजाइम या ट्रांसपोर्ट प्रोटीन सही तरह से काम न कर पाये।
- उस पथ का सब्सट्रेट (उदाहरण‑स्वरूप अमीनो‑एसिड, कार्बोहाइड्रेट, वसा) सही तरह से टूट न सके, जिससे वह जमा हो जाये और विषैला (toxic) प्रभाव करे।
- या फिर उस पथ द्वारा बनने वाला आवश्यक उत्पाद (product) पर्याप्त मात्रा में न बन पाए।
- परिणामस्वरूप ऊतक (tissues) और अंग (organs) प्रभावित हो सकते हैं—विशेष रूप से मस्तिष्क (brain), यकृत (liver), गुर्दा (kidney) आदि।
- नवजात काल (newborn period) में यह समस्या अक्सर सामने आती है, क्योंकि जन्म के बाद खाने‑पीने की शुरुआत होते ही चयापचय सक्रिय होता है।
Inborn Errors of Metabolism कारण (Causes)
आनुवंशिक कारण
- IEM अधिकांशतः विरासत में आने वाले (inherited) अनुवांशिक (genetic) विकार हैं।
- इनमें अक्सर ऑटोसोमल रिसेसिव (autosomal recessive) वंशानुक्रम होता है—दोनों माता‑पिता से दोषयुक्त जीन मिलने पर रोग प्रकट होता है।
- कभी‑कभी ऑटोसोमल डोमिनेंट (autosomal dominant) या एक्स‑लिंक्ड (X‑linked) रूप भी हो सकते हैं।
- उदाहरणस्वरूप, यदि ‘कार्बामॉयल फॉस्फेट सिंथेटेज 1’ नामक एंजाइम में दोष हो, तो वो IEM कहलाती है “CPS1 deficiency”।
जैव‑रासायनिक/मेटाबॉलिक कारण
- एंजाइम का कार्य बंद या कम होना।
- सब्सट्रेट का जमा होना (accumulation) और विषैला प्रभाव।
- आवश्यक उत्पाद न बनने की वजह से शरीर में कमी होना।
- चयापचय पथों में ऊर्जा‑उत्पादन (energy production) में दोष।
अन्य जोखिम‑कारक
- पारिवारिक इतिहास में IEM का होना।
- माता‑पिता के बीच जन्म संबंधी निकट संबंध (consanguinity) होना—कुछ अध्ययन में यह पाया गया है कि ऐसी स्थिति में IEM का खतरा बढ़ सकता है।
- नवजात स्क्रीनिंग (newborn screening) न होना।
Inborn Errors of Metabolism लक्षण (Symptoms)
चूंकि IEM कई प्रकार के हो सकते हैं, लक्षण व्यापक रूप से भिन्न‑भिन्न हैं। नीचे सामान्य रूप से देखे जाने वाले लक्षण दिए गए हैं:
नवजात एवं शिशु‑काल में
- दूध न पचना या बहुत कम पचना, भूख कम होना, वजन बढ़ने में कमी (failure to thrive)।
- उल्टी, डायरिया, निर्जलीकरण (dehydration)।
- तापमान अस्थिरता, श्वसन तेज होना (tachypnea), श्वसन रुकना (apnea) या धीमी धड़कन (bradycardia)।
- मांसपेशियों में कोमलता (hypotonia) या असामान्य टोन, दौरे (seizures), चेतना में कमी।
- पीलिया (jaundice), यकृत बढ़ना (hepatomegaly) या गुर्दा में समस्या।
बच्चों और बाद के आयु में
- विकास‑विलंब (developmental delay), मानसिक दुष्क्रिया (intellectual disability)।
- परफवा (ataxia), देख‑सुन में समस्या (visual/auditory abnormalities)।
- भूख कम होना या खाने‑से परहेज (food aversion), विशेष रूप से प्रोटीन‑संबंधित आहार से।
- असामान्य गंध वाले पेशाब/सांस (unusual urine/breath odor) या त्वचा‑रंग परिवर्तन।
कुछ विशेष संकेत
- अचानक शुरू होने वाला मेटाबॉलिक क्राइसिस (metabolic crisis) जैसे कि अमोनिया में वृद्धि (hyperammonemia) या लंबी‑चेन फैटी एसिड ऑक्सीकरण दोष (LC‑FAOD) में अचानक कमजोरी।
- श्वसन तकनीकी अस्थिरता, कार्डियोमायोपैथी (cardiomyopathy) जैसे ऊर्जा‑उत्पादन दोषों में।
Inborn Errors of Metabolism कैसे पहचानें (How to identify / Diagnosis)
IEM की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि लक्षण बहुत सामान्य हो सकते हैं (उदाहरण‑स्वरूप भूख कम होना, उल्टी, निर्जलीकरण)। इसलिए डॉक्टर को उच्च सतर्कता (high index of suspicion) रखनी पड़ती है।
प्रारंभिक जाँच
- ग्लूकोज, लैक्टेट (lactate), अमोनिया (ammonia), की‑टोन्स (ketones) आदि।
- यकृत, गुर्दा‑फंक्शन टैस्ट, रक्त‑गैस (arterial blood gas) आदि।
- यदि नवजात स्क्रीनिंग उपलब्ध हो तो उससे IEM के लिए स्क्रीन करना।
विशिष्ट जाँचें
- रक्त और मूत्र में विशेष मेटाबॉलाइट्स (metabolites) की जाँच जैसे ताण्डेम मास स्पेक्ट्रोमेट्री (tandem mass spectrometry) या गैस क्रोमैटोग्राफी‑मास स्पेक्ट्रोमेट्री (GC‑MS)।
- एंजाइम परीक्षण (enzyme assay) या जीन परीक्षण (genetic testing) यदि संदिग्ध हो।
- नवजात स्क्रीनिंग में कई विकारों का पता पहले ही हो सकता है।
कौन‑कौन से संकेत रफ्तार से पहचान में मदद करते हैं?
- यदि नवजात में सामान्य कारण न मिल रहे हों (उदाहरण: नवीन जन्म के बाद अचानक कमजोरी/उल्टी) तो IEM की संभावना।
- माता‑पिता के बीच निकट‑संबंध (consanguinity) या परिवार में ऐसी कोई समस्या।
- विशेष आहार‑सहनशीलता समस्या (उदाहरण: दूध पचाने में समस्या, प्रोटीन‑आहार से प्रतिक्रिया)।
Inborn Errors of Metabolism इलाज (Treatment)
IEM के इलाज में लक्ष्य होता है — जमा विषैले पदार्थों को कम करना, आवश्यक यौगिकों की कमी को पूरा करना, चयापचय को सामान्य बनाना।
मुख्य उपचार उपाय
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आहार प्रबंधन (Diet therapy):
- दोषी पथ में सब्सट्रेट की मात्रा कम करना (उदाहरण: प्रोटीन‑मित आहार) ।
- आवश्यक यौगिक (products) देना या को‑फैक्टर देना।
- उदाहरणः नवजात में ‘गैलैक्टोसीमिया (Galactosaemia)’ में दूध में गैलैक्टोज हटाना।
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एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी (Enzyme Replacement Therapy, ERT): कुछ विकारों में उपलब्ध।
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सबस्ट्रेट रिडक्शन (Substrate reduction): जमा विषैले पदार्थों को कम करने के लिए।
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** अंग प्रत्यारोपण (Organ transplantation):** जैसे लिवर ट्रांसप्लांट कुछ मामलों में।
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गर्भपूर्व निदान एवं आनुवंशिक परामर्श (Prenatal diagnosis and Genetic counselling): प्रभावित परिवारों में।
इलाज की चुनौतियाँ
- बहुत से विकार दुर्लभ हैं—विशिष्ट उपचार हर जगह उपलब्ध नहीं।
- समय‑प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण है—जितनी जल्दी पहचान होगी, उतना बेहतर परिणाम।
- उम्र‑साथ बदलाव हो सकते हैं—कुछ विकार नवजात में दिखें, कुछ बाद में।
Inborn Errors of Metabolism कैसे रोके (Prevention)
- नवजात स्क्रीनिंग प्रोग्राम: जन्म के तुरंत बाद स्क्रीनिंग से IEM जल्दी पकड़ाई जा सकती है।
- परिवार‑सदस्यों का परामर्श (Family genetic counselling): यदि पहले से ऐसी समस्या परिवार में हो।
- ** निकट‑संबंध विवाह (Consanguinity) से सावधानी:** यदि परिवार में आनुवंशिक रोगों का इतिहास हो।
- गर्भावस्था के दौरान उचित देख‑भाल (Prenatal care): यदि जोखिम अधिक हो तो जीन टेस्टिंग।
- शैक्षिक जागरूकता: डॉक्टर‑माता‑पिता दोनों को ज्ञात होना चाहिए कि “सामान्य प्रसवोत्तर समस्या (vomiting, lethargy)” भी IEM का संकेत हो सकती है।
घरेलू उपाय (Home‑based supportive measures)
हालाँकि IEM का मुख्य उपचार चिकित्सकीय होता है, पर घर पर निम्न उपाय सहायक हो सकते हैं:
- रोगी/शिशु को डॉक्टर की सलाह के अनुसार विशेष आहार देना—प्रोटीन‑मित, कार्बोहाइड्रेट नियंत्रित आदि।
- नियमित भोजन‑समय व उचित पोषण सुनिश्चित करना।
- उल्टी, निर्जलीकरण, बुखार इत्यादि लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सक से मिलना।
- डॉक्टर द्वारा सुझाए गए आहार‑परिवर्तन, चिकित्सा निर्देशों का पालन करना।
- रोगी को संक्रमण के जोखिम से बचाना (क्योंकि कुछ IEM में संक्रमण से क्राइसिस आरंभ हो सकते हैं)।
- डॉक्टर द्वारा निर्धारित नियमित जाँच‑परीक्षा कराना।
सावधानियाँ (Precautions)
- किसी भी सप्लीमेंट या लोकप्रिय उपाय डॉक्टर/मेटाबॉलिक विशेषज्ञ से बिना सलाह न लें।
- बच्चे में अचानक से सामान्य से हटकर लक्षण दिखें (उल्टी, मांसपेशियों की कमजोरी, चेतना में परिवर्तन) तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें—यह IEM क्राइसिस का संकेत हो सकता है।
- आहार‑परिवर्तन अचानक बंद न करें, विशेष रूप से चिकित्सक द्वारा निर्देशित आहारों को।
- यदि परिवार में IEM का इतिहास है, तो अगली गर्भावस्था में विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।
- अस्पताल/डॉक्टर को बच्चे का मेटाबॉलिक स्क्रीनिंग रिपोर्ट, संबद्ध जीन‑टेस्ट जानकारी दिखाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. IEM कितनी सामान्य है?
A. यह अलग‑अलग विकारों का समूह है। एक अध्ययन में नवजातों में इसका पुष्ट प्रमाण मिलना है—विरल लेकिन मात्रा में कम नहीं।
Q2. क्या IEM का इलाज संभव है?
A. हाँ, कई प्रकार के IEM आज इलाज योग्य हैं—विशेष आहार, एंजाइम रिप्लेसमेंट, अंग प्रत्यारोपण आदि विकल्प उपलब्ध हैं।
Q3. क्या IEM सिर्फ नवजात में होता है?
A. नहीं। कुछ IEM नवजात काल में लगता है, लेकिन कुछ बच्चे या वयस्कों में देर से भी दिख सकता है।
Q4. क्या IEM सिर्फ अमीनो‑एसिड रिलेटेड होता है?
A. नहीं। इसमें कार्बोहाइड्रेट, वसा, अमीनो‑एसिड, यूरीया सर्कल आदि कई पथ शामिल हो सकते हैं।
Q5. क्या घर पर आहार‑सुधार से IEM ठीक हो सकता है?
A. आहार‑सुधार महत्वपूर्ण है पर अकेले पर्याप्त नहीं हो सकता। निदान और चिकित्सा देखभाल आवश्यक है।
निष्कर्ष
जन्मजात चयापचय त्रुटि (IEM) एक जटिल लेकिन समायोज्य (treatable) समूह है। यदि समय रहते पहचान हो जाए और उचित उपचार उपलब्ध हो, तो प्रभावित बच्चों को अधिक सामान्य जीवन जीने का अवसर मिलता है। पैतृक‑इतिहास, नवजात स्क्रीनिंग, उच्च सतर्कता और विशेषज्ञ परामर्श इस क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आहार‑प्रबंधन, तथा नियमित चिकित्सकीय समीक्षा के माध्यम से परिणामों में सुधार संभव है।
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