Khushveer Choudhary

Ketotic Hypoglycemia: कारण, लक्षण, इलाज और सावधानियाँ

केटोटिक हाइपोग्लाइसेमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त में ग्लूकोज (Blood sugar / ग्लूकोज) बहुत कम हो जाता है और उसी समय केटोन्स (Ketone bodies) का स्तर बढ़ जाता है।

यह स्थिति विशेष रूप से 6 माह-6 वर्ष तक के बच्चों में आम है, जिनमें डायबटीज़ (Diabetes) नहीं होता।
इसमें सामान्यतः भूख लगने पर भोजन नहीं हुआ हो, लंबी अवधि उपवास हो, या बीमारी के कारण खाना कम हो गया हो।

केटोटिक हाइपोग्लाइसेमिया क्या होता है? (What is Ketotic Hypoglycemia?)

जब बच्चे का भोजन कम हो जाए या वह लंबी अवधि भूखा रहे, तो उसके शरीर में ग्लूकोज स्रोत खत्म होने लगते हैं।
इसके बाद शरीर ऊर्जा के लिए चर्बी (fat) जलाना शुरू करता है, जिससे केटोन्स बनते हैं। केटोन्स बढ़ने के साथ ही रक्त शर्करा (blood glucose) भी गिर सकती है — यही केटोटिक हाइपोग्लाइसेमिया की अवस्था है।
शायद यह बच्चों में इसलिए ज्यादा होता है क्योंकि उनका ग्लूकोज भंडार (glycogen stores) कम होता है और भूखेपन में जल्दी प्रतिक्रिया होती है।

केटोटिक हाइपोग्लाइसेमिया कारण (Causes of Ketotic Hypoglycemia)

  • लंबी अवधि उपवास (Prolonged fasting) या रात में भोजन छोड़ देना।
  • बीमारी, उल्टी या दस्त (Vomiting/Diarrhea) जिससे भोजन कम हो जाए और निर्जलीकरण (Dehydration) हो जाए।
  • कम उम्र (Young age) — विशेष रूप से 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चे।
  • मेटाबॉलिक या हार्मोनल विकार (Metabolic or hormonal disorders) जैसे ग्लाइकोजन संग्रहण रोग (glycogen storage diseases), ग्रोथ हार्मोन कमी (growth hormone deficiency) आदि।
  • शरीर का ग्लूकोज भंडार जल्दी खत्म होना — उदाहरण के लिए कम चर्बी, कम ग्लाइकोजन स्टोर।

केटोटिक हाइपोग्लाइसेमिया लक्षण (Symptoms of Ketotic Hypoglycemia)

लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • अचानक थकावट, सुस्ती, झपिरापन (Lethargy)
  • भूख लगना, लेकिन खाने की इच्छा कम होना या खाना नहीं जाना।
  • पसीना आना, हाथ-पाँव ठंडे होना, दिल की धड़कन बढ़ना
  • सिरदर्द, चक्कर आना, नीला पीलापन (pallor)
  • केटोन्स की वजह से सांसों में मीठी/फ्रूटी गंध (fruity breath smell) आ सकती है।
  • गंभीर स्थिति में दौरे (seizures) या बेहोशी (loss of consciousness) हो सकते हैं।

केटोटिक हाइपोग्लाइसेमिया कैसे पहचानें (How to Identify Ketotic Hypoglycemia)

  • रक्त शर्करा (blood glucose) बहुत कम होना (लगभग < 70 mg/dL) साथ में केटोन्स (ketone bodies) की उपस्थिति।
  • लक्षण के समय ग्लूकोज और केटोन्स की जाँच हो।
  • अन्य कारणों जैसे डायबटीज़, हार्मोनल कमी, मेटाबॉलिक बीमारी को बाहर करना (Diagnosis of exclusion)।
  • सामान्यतः सुबह-सुबह, उपवास के बाद या बीमारी के दौरान लक्षण उत्पन्न।

केटोटिक हाइपोग्लाइसेमिया इलाज (Treatment of Ketotic Hypoglycemia)

  • तुरंत शक्कर युक्त भोजन या जूस (Glucose / Sugar-rich food/drink) देना ताकि रक्त शर्करा बढ़े।
  • यदि बच्चे चल नहीं सकता या उल्टी कर रहा हो, तो अस्पताल में IV ग्लूकोज (intravenous glucose) की आवश्यकता हो सकती है।
  • उपवास से बचने के लिए नियमित भोजन-नाश्ता देना, विशेष रूप से रात में सोने से पहले।
  • गंभीर या पुनरावृत्ति (recurrent) मामलों में खाने में लंबे चक्र (slow-release carbohydrate) जैसे अनकुक्ड कॉर्नस्टार्च (uncooked cornstarch) इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • यदि किसी मेटाबॉलिक या हार्मोनल समस्या से जुड़ा हो, तो उसकी विशेष उपचार।

घरेलू उपाय (Home Remedies for Ketotic Hypoglycemia)

  • रात को सोने से पहले हल्का लेकिन कार्बोहाइड्रेट-समृद्ध नाश्ता देना (जैसे दलिया, ब्रेड + दूध)।
  • बच्चों को पर्याप्त पानी देना, निर्जलीकरण से बचाना।
  • बच्चे को बीमारी या उल्टी-दस्त के समय भूखे न रहने देना।
  • परिवार को जागरूक करना कि भूखेपन में त्वरित लक्षण समझे जाएँ।

सावधानियाँ (Precautions)

  • लक्षण दिखते ही भोजन या ग्लूकोज तुरंत देना चाहिए। देरी करने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
  • बार-बार होने वाले या 6 वर्ष से ऊपर बच्चों में दिखने वाले कीटोटिक हाइपोग्लाइसेमिया में मेटाबॉलिक/हॉर्मोनल कारण जांचने की जरूरत।
  • कभी भी मरीज को बिना निरीक्षण के उपवास न दें।
  • बच्चों को उल्टी-दस्त या भूखेपन में अकेला न छोड़ें क्योंकि निम्न रक्त शर्करा और केटोन्स से बिगड़ी स्थिति हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या केवल बच्चों को ही केटोटिक हाइपोग्लाइसेमिया होता है?
A. सामान्यतः यह 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में अधिक पाया गया है पर बहुत ही दुर्लभ रूप में व्यस्कों में भी हो सकता है।

Q2. क्या यह डायबटीज़ से संबंधित है?
A. नहीं — यह स्थिति आमतौर पर गैर-डायबटीज़ (non-diabetic) बच्चों में होती है।

Q3. क्या यह पूरी तरह ठीक हो जाता है?
A. हाँ, अधिकांश मामलों में यह समय के साथ स्वयं सुधर जाता है, विशेषकर बच्चों में जैसे वे बड़े होते हैं।

Q4. क्या किटोटिक हाइपोग्लाइसेमिया गंभीर हो सकता है?
A. हाँ— यदि ग्लूकोज बहुत कम हो जाए या केटोन्स बहुत अधिक हों, तो दौरे या कोमा जैसे स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

Q5. क्या डायट (आहार) बदलने से इसे रोका जा सकता है?
A. उपवास से बचना, नियमित भोजन-नाश्ता देना, रात को हल्का कार्बोहाइड्रेट नाश्ता देना इस रोग को रोकने में मदद करता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

केटोटिक हाइपोग्लाइसेमिया एक आम लेकिन अक्सर अनदेखी जाने वाली स्थिति है, विशेषकर छोटे बच्चों में।
यदि उपवास, बीमारी या खाने-पानी कम होने के बाद बच्चा सुस्त हो जाए, उल्टी करे, घबराये या दौरे आएँ — तो इस स्थिति का विचार करना चाहिए।
सही समय पर निदान, भोजन-नाश्ता में संतुलन, जल्द-से-जल्द ग्लूकोज देना और यदि आवश्यक हो तो विशेषज्ञ की जांच — इनसे यह स्थिति अच्छी तरह नियंत्रित हो सकती है।
बच्चों के लिए यह एक ऐसा प्रकार है जिसे अक्सर उम्र के साथ ही ठीक कर लिया जाता है, लेकिन सावधानी बरतना बेहद आवश्यक है

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