Khushveer Choudhary

Oxalosis क्या है? – इसके कारण, लक्षण, इलाज, रोकथाम और सावधानियाँ

Oxalosis जिसे हिंदी में ऑक्सालोसिस कहा जाता है, शरीर में Oxalate (ऑक्सेलेट) की अत्यधिक मात्रा जमा होने की स्थिति है। जब शरीर ऑक्सेलेट को सही से बाहर नहीं निकाल पाता, तो यह गुर्दों (Kidneys), हड्डियों (Bones), हृदय (Heart), आंखों (Eyes) और अन्य ऊतकों में जमने लगता है। यह स्थिति गंभीर होती है और समय पर उपचार आवश्यक है।

Oxalosis अक्सर Primary Hyperoxaluria नामक आनुवांशिक रोग का परिणाम होती है, लेकिन यह किडनी की खराबी के कारण भी विकसित हो सकती है।

Oxalosis क्या होता है? (What is Oxalosis?)

Oxalosis वह स्थिति है जिसमें ऑक्सेलेट शरीर के अलग-अलग भागों में जमा होने लगता है, खासकर तब जब किडनी इसे मूत्र के माध्यम से बाहर निकालने में असमर्थ होती है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • ऑक्सेलेट क्रिस्टल शरीर के ऊतकों में जमा होते हैं
  • किडनी फेल होने का खतरा
  • अक्सर Primary Hyperoxaluria के मरीजों में देखा जाता है
  • पूरे शरीर (Systemic) को प्रभावित करने वाली बीमारी

Oxalosis के कारण (Causes of Oxalosis)

Oxalosis दो प्रकार से हो सकता है:

1. Primary Oxalosis (प्राथमिक ऑक्सालोसिस)

यह आनुवांशिक (Genetic) कारणों से होता है और मुख्य रूप से Primary Hyperoxaluria (PH1, PH2, PH3) के कारण विकसित होता है।
इसमें शरीर अत्यधिक मात्रा में ऑक्सेलेट बनाता है जिसे किडनी बाहर नहीं निकाल पाती।

2. Secondary Oxalosis (द्वितीयक ऑक्सालोसिस)

यह किडनी खराब होने, खानपान या अन्य रोगों के कारण होता है।
कारण:

  • किडनी की विफलता (Kidney Failure)
  • अत्यधिक ऑक्सेलेट युक्त भोजन (जैसे पालक, चॉकलेट, चुकंदर, नट्स)
  • विटामिन C की अधिक मात्रा
  • आंतों से जुड़ी समस्याएँ – जैसे Crohn’s disease, Chronic diarrhea
  • Gastric bypass surgery के बाद

Oxalosis के लक्षण (Symptoms of Oxalosis)

Oxalosis के लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं और पूरे शरीर को प्रभावित कर सकते हैं:

1. किडनी संबंधी लक्षण

  • बार-बार किडनी स्टोन (Recurrent Kidney Stones)
  • किडनी में दर्द
  • मूत्र में खून (Hematuria)
  • किडनी का खराब होना या फेल होना

2. हड्डियों संबंधी लक्षण

  • हड्डियों में दर्द
  • कमजोर हड्डियाँ (Bone Fragility)
  • फ्रैक्चर होने का खतरा

3. हृदय संबंधी लक्षण

  • दिल की धड़कन में बदलाव
  • Cardiac arrhythmia
  • कैल्शियम ऑक्सेलेट जमने से हृदय की कार्यक्षमता कम होना

4. अन्य लक्षण

  • थकान
  • कमजोरी
  • त्वचा में रंग परिवर्तन
  • आंखों में जलन, दर्द या दृष्टि समस्या

Oxalosis कैसे पहचाने (How to Identify/Diagnosis of Oxalosis)

Oxalosis की पहचान निम्नलिखित तरीकों से की जाती है:

  1. 24-Hour Urine Test
    ऑक्सेलेट की मात्रा मापने के लिए।

  2. Blood Test
    किडनी फंक्शन (Creatinine, BUN) और ऑक्सेलेट स्तर जांचने के लिए।

  3. Kidney Ultrasound / CT Scan
    किडनी स्टोन या किडनी की क्षति का पता लगाने के लिए।

  4. Genetic Testing
    Primary Hyperoxaluria की पुष्टि के लिए।

  5. Biopsy (Kidney/Bone)
    ऊतकों में कैल्शियम ऑक्सेलेट जमा है या नहीं, यह देखने के लिए।

Oxalosis का इलाज (Treatment of Oxalosis)

Oxalosis का इलाज कारण के अनुसार किया जाता है:

1. दवाएँ (Medications)

  • Potassium Citrate या Sodium Citrate – ऑक्सेलेट कम करने में मदद
  • Vitamin B6 (Pyridoxine) – Primary Hyperoxaluria के कुछ मरीजों में लाभदायक
  • Calcium supplements – आंतों में ऑक्सेलेट के अवशोषण को रोकने के लिए

2. आहार में बदलाव (Dietary Management)

  • Low Oxalate Diet
  • नमक कम
  • प्रोटीन सीमित करना
  • अधिक पानी पीना

3. Dialysis

गंभीर किडनी फेलियर में रक्त से ऑक्सेलेट हटाने के लिए।

4. Liver Transplant

Primary Hyperoxaluria type 1 में आवश्यक होता है।

5. Kidney Transplant

किडनी फेल होने पर।

6. Combined Liver and Kidney Transplant

बहुत गंभीर मामलों में आवश्यक।

Oxalosis कैसे रोके (Prevention of Oxalosis)

विशेष रूप से Secondary Oxalosis को नियंत्रित किया जा सकता है:

  • अत्यधिक ऑक्सेलेट वाले भोजन कम करें
  • पर्याप्त पानी पिएं
  • विटामिन C का अत्यधिक सेवन न करें
  • किडनी की नियमित जांच करवाएँ
  • आंत संबंधी रोगों का समय पर इलाज करें
  • शराब और धूम्रपान से बचें

Oxalosis के घरेलू उपाय (Home Remedies for Oxalosis)

ध्यान: घरेलू उपाय केवल सहायक होते हैं, मुख्य इलाज नहीं।

  • दिनभर में 2.5–3 लीटर पानी पिएं
  • Low-oxalate diet अपनाएं
  • नींबू पानी (Citrate मदद करता है)
  • फाइबर युक्त भोजन
  • नमक और शर्करा कम करें

कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट न लें।

Oxalosis में सावधानियाँ (Precautions)

  • High-oxalate foods जैसे पालक, चॉकलेट, नट्स कम करें
  • नियमित रूप से किडनी चेकअप कराएं
  • अधिक विटामिन C या D सप्लीमेंट न लें
  • बच्चे में बार-बार किडनी स्टोन आए तो तुरंत परीक्षण कराएं
  • खुद से दवाएँ न लें

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. क्या Oxalosis पूरी तरह ठीक हो सकता है?
Primary Oxalosis पूरी तरह ठीक नहीं होता लेकिन सही उपचार से नियंत्रण में रहता है। Secondary Oxalosis का इलाज संभव है।

Q2. क्या Oxalosis केवल किडनी को प्रभावित करता है?
नहीं, यह हड्डियों, दिल, त्वचा और आंखों समेत कई अंगों को प्रभावित कर सकता है।

Q3. क्या Oxalosis में डाइट महत्वपूर्ण है?
हाँ, Low-oxalate diet बहुत जरूरी है।

Q4. क्या बच्चों में Oxalosis हो सकता है?
हाँ, Primary Hyperoxaluria के रूप में जन्म से ही हो सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

Oxalosis एक गंभीर स्थिति है जिसमें ऑक्सेलेट शरीर में जमा होकर किडनी सहित कई अंगों को नुकसान पहुँचाता है। समय पर पहचान, नियमित जांच, सही दवाओं, कम ऑक्सेलेट वाले आहार और विशेषज्ञ की निगरानी में उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। किसी भी प्रकार के लगातार किडनी स्टोन, मूत्र संबंधी समस्या या थकान होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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