आग लगने की घटनाओं में जलने से ज्यादा मौतें धुआँ सूंघने (Smoke Inhalation) के कारण होती हैं। धुआँ केवल गर्म हवा नहीं है, बल्कि इसमें जहरीली गैसें, रसायन और सूक्ष्म कण (Particulates) होते हैं जो फेफड़ों और श्वसन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं। धुएँ के कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जो कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकती है।
धुआँ शरीर को कैसे नुकसान पहुँचाता है?
धुएँ के कारण शरीर पर तीन तरह से हमला होता है:
- ऑक्सीजन की कमी (Asphyxiation): धुआँ हवा से ऑक्सीजन को हटा देता है, जिससे दम घुटने लगता है।
- रासायनिक जलन: धुएँ में मौजूद अमोनिया, क्लोरीन और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे रसायन फेफड़ों की नली में सूजन और जलन पैदा करते हैं।
- जहरीली गैसें: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोजन साइनाइड जैसी गैसें रक्त में ऑक्सीजन के प्रवाह को रोक देती हैं।
धुआँ सूंघने के लक्षण (Symptoms)
लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्ति धुएँ के संपर्क में कितनी देर रहा:
- खांसी: बार-बार और लगातार खांसी आना।
- सांस लेने में कठिनाई (Shortness of Breath): भारी सांसें लेना या हांफने लगना।
- आवाज में भारीपन: धुएँ के कारण स्वरयंत्र (Larynx) में सूजन आना।
- आंखों में जलन और लालिमा: धुएँ के रसायनों के कारण।
- त्वचा का रंग बदलना: त्वचा पीली, नीली (ऑक्सीजन की कमी से) या चेरी जैसी लाल (कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता से) हो सकती है।
- सिरदर्द और भ्रम: मस्तिष्क तक ऑक्सीजन न पहुँचने के कारण चक्कर आना या बेहोश होना।
- थूक में कालिख (Soot): नाक या गले से निकलने वाले बलगम में काले कणों का होना।
प्राथमिक उपचार: क्या करें? (First Aid Steps)
यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को देखते हैं जो धुएँ के संपर्क में आया है, तो तुरंत ये कदम उठाएं:
- सुरक्षित स्थान पर ले जाएं: सबसे पहले व्यक्ति को धुएँ वाले स्थान से बाहर निकालें और खुली, ताजी हवा में ले जाएं। (स्वयं की सुरक्षा का ध्यान रखें)।
- सांस की जांच करें: देखें कि व्यक्ति सांस ले रहा है या नहीं। यदि सांस नहीं चल रही है, तो तुरंत CPR शुरू करें।
- कपड़े ढीले करें: गर्दन और छाती के आसपास के तंग कपड़ों को ढीला करें ताकि सांस लेने में आसानी हो।
- बैठने की स्थिति: यदि व्यक्ति होश में है, तो उसे सीधा बिठाएं। लेटने से सांस लेने में अधिक कठिनाई हो सकती है।
- मेडिकल हेल्प: तुरंत एम्बुलेंस (102 या 108) को कॉल करें, भले ही व्यक्ति ठीक दिख रहा हो (कुछ लक्षण देरी से प्रकट होते हैं)।
चिकित्सा उपचार (Medical Treatment)
अस्पताल में डॉक्टर निम्नलिखित उपचार दे सकते हैं:
- ऑक्सीजन थेरेपी: मास्क के जरिए शुद्ध ऑक्सीजन देना।
- हाइपरबेरिक ऑक्सीजन (HBO): कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता के लिए एक विशेष कक्ष में उच्च दबाव वाली ऑक्सीजन देना।
- ब्रोंकोडायलेटर्स: फेफड़ों की नलियों को खोलने वाली दवाएं।
- चेस्ट एक्स-रे और सीटी स्कैन: फेफड़ों की क्षति की जांच के लिए।
आग और धुएँ से बचाव के उपाय (Prevention Tips)
- स्मोक डिटेक्टर: घर और ऑफिस में स्मोक अलार्म लगाएं और उनकी बैटरियां चेक करते रहें।
- नीचे झुककर निकलें: यदि आप धुएँ से भरे कमरे में फंस गए हैं, तो फर्श के करीब झुककर चलें (रेंगकर निकलें), क्योंकि धुआँ हमेशा ऊपर की ओर उठता है और नीचे की हवा थोड़ी साफ होती है।
- गीला कपड़ा: अपनी नाक और मुँह को गीले कपड़े से ढकें ताकि धुएँ के कण फेफड़ों में न जाएं।
- लिफ्ट का प्रयोग न करें: आग लगने पर हमेशा सीढ़ियों का उपयोग करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या धुआँ सूंघने के लक्षण बाद में दिख सकते हैं?
हाँ, इसे 'डिलेड रिएक्शन' कहते हैं। फेफड़ों में सूजन या तरल पदार्थ (Pulmonary Edema) जमा होने के लक्षण 24 से 48 घंटे बाद भी आ सकते हैं।
2. कार्बन मोनोऑक्साइड को 'साइलेंट किलर' क्यों कहते हैं?
क्योंकि इसकी कोई गंध, रंग या स्वाद नहीं होता, और यह व्यक्ति को बिना पता चले बेहोश कर सकती है।
3. क्या किचन का धुआँ भी खतरनाक है?
लंबे समय तक बिना वेंटिलेशन (बिना चिमनी या खिड़की) के चूल्हे का धुआँ सूंघना फेफड़ों की बीमारियों का कारण बन सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
धुआँ सूंघना एक गंभीर स्थिति है जिसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। आग से बचना जितना जरूरी है, धुएँ से फेफड़ों की सुरक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। समय पर प्राथमिक उपचार और डॉक्टरी सलाह किसी की जान बचा सकती है।
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