टिल्ट टेबल टेस्ट (Tilt Table Test) एक विशेष प्रकार की डायग्नोस्टिक जांच (Diagnostic Test) है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब मरीज को चक्कर आना (dizziness), बेहोशी (fainting or syncope) या ब्लड प्रेशर की समस्या हो। यह जांच शरीर की पोजीशन बदलने पर हृदय की दर (heart rate) और रक्तचाप (blood pressure) में आने वाले बदलावों को रिकॉर्ड करती है।
टिल्ट टेबल टेस्ट क्या होता है ? (What is Tilt Table Test?):
टिल्ट टेबल टेस्ट में मरीज को एक विशेष टेबल पर लिटाया जाता है जिसे धीरे-धीरे खड़ा किया जाता है ताकि यह देखा जा सके कि शरीर की पोजीशन बदलने पर उसका दिल और ब्लड प्रेशर कैसे प्रतिक्रिया देता है। इससे यह पता चलता है कि बेहोशी के एपिसोड्स के पीछे न्यूरोलॉजिकल या कार्डियक कारण हैं या नहीं।
टिल्ट टेबल टेस्ट की आवश्यकता क्यों पड़ती है? (Why is it needed?):
- अस्पष्ट बेहोशी (Unexplained Fainting)
- पोस्ट्युरल ऑर्थोस्टेटिक टैकीकार्डिया सिंड्रोम (POTS)
- न्यूरोकार्डियोजेनिक सिन्कोप (Neurocardiogenic Syncope)
- ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन (Orthostatic Hypotension)
टिल्ट टेबल टेस्ट के कारण (Causes to perform test):
- बार-बार बेहोश होना
- चक्कर आना
- हृदय गति अनियमित होना
- ब्लड प्रेशर की अनियमितता
- पसीना आना और थकावट
टिल्ट टेबल टेस्ट के लक्षण (Symptoms suggesting test is needed):
- बार-बार बेहोशी (Recurrent fainting)
- अचानक चक्कर आना (Sudden dizziness)
- खड़े होने पर कमजोरी महसूस होना (Weakness while standing)
- धड़कन तेज़ होना (Rapid heartbeats while standing)
- सीने में हल्का दर्द या बेचैनी (Mild chest discomfort)
टिल्ट टेबल टेस्ट की प्रक्रिया (Test Procedure):
- मरीज को एक सपाट टेबल पर लिटाया जाता है और ECG व BP मॉनिटरिंग से जोड़ा जाता है।
- टेबल को धीरे-धीरे लगभग 60-80 डिग्री तक खड़ा किया जाता है।
- हृदय गति और ब्लड प्रेशर पर नज़र रखी जाती है।
- प्रक्रिया आमतौर पर 30 से 45 मिनट की होती है।
- जरूरत पड़ने पर दवाइयाँ दी जाती हैं जो लक्षणों को ट्रिगर कर सकें।
टिल्ट टेबल टेस्ट से पहले की तैयारी (Preparation Before Test):
- टेस्ट से 4-6 घंटे पहले कुछ न खाएं
- डॉक्टर को अपनी सभी दवाइयों की जानकारी दें
- आरामदायक कपड़े पहनें
- टेस्ट से पहले पर्याप्त नींद लें
टिल्ट टेबल टेस्ट को कैसे रोका नहीं जा सकता लेकिन समझा जा सकता है (How to prevent conditions needing this test):
- नियमित BP मॉनिटरिंग करें
- डिहाइड्रेशन से बचें
- कैफीन और शराब का सीमित सेवन करें
- स्ट्रेस कम करें और पर्याप्त नींद लें
घरेलू उपाय (Home Remedies):
- खूब पानी पीएं
- नमक की मात्रा संतुलित रखें
- कैफीनयुक्त पेय पदार्थ सीमित मात्रा में लें
- अचानक खड़े न हों
- पांव क्रॉस कर बैठने से ब्लड प्रेशर में सुधार हो सकता है
सावधानियाँ (Precautions):
- टेस्ट के दौरान बेचैनी या चक्कर महसूस हो सकता है
- बेहोशी की स्थिति बन सकती है
- हमेशा किसी प्रशिक्षित कार्डियोलॉजिस्ट की निगरानी में करवाएं
- यदि टेस्ट के बाद कमजोरी हो तो तुरंत डॉक्टर को बताएं
कैसे पहचाने कि आपको टिल्ट टेबल टेस्ट की ज़रूरत है? (How to identify the need for Tilt Table Test):
- यदि आपकी बेहोशी के कारण स्पष्ट नहीं हैं
- बार-बार खड़े होते ही चक्कर या धड़कन बढ़ना
- हार्ट टेस्ट नॉर्मल आने के बावजूद लक्षण बने रहना
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):
प्रश्न 1: क्या टिल्ट टेबल टेस्ट दर्दनाक होता है?
उत्तर: नहीं, यह नॉन-इनवेसिव टेस्ट है और दर्दरहित होता है।
प्रश्न 2: क्या इसके लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है?
उत्तर: नहीं, यह आउटपेशेंट टेस्ट होता है।
प्रश्न 3: क्या टिल्ट टेबल टेस्ट के बाद थकान महसूस हो सकती है?
उत्तर: हाँ, थोड़ी कमजोरी या थकावट हो सकती है।
प्रश्न 4: इस टेस्ट की कीमत कितनी होती है?
उत्तर: भारत में यह टेस्ट ₹1500 से ₹5000 के बीच हो सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion):
टिल्ट टेबल टेस्ट एक अत्यंत उपयोगी डायग्नोस्टिक प्रक्रिया है जो बार-बार होने वाली बेहोशी या चक्कर की जड़ तक पहुँचने में मदद करती है। यह टेस्ट पूरी तरह से सुरक्षित, सरल और दर्दरहित होता है। यदि आपको बार-बार बेहोशी या खड़े होते समय चक्कर आने की शिकायत है, तो अपने डॉक्टर से टिल्ट टेबल टेस्ट के बारे में सलाह जरूर लें।
