Khushveer Choudhary

Gestational Diabetes Mellitus - कारण, लक्षण, इलाज और बचाव

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में कई शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। इनमें से एक आम समस्या है गर्भावधि मधुमेह (Gestational Diabetes Mellitus - GDM)। यह मधुमेह का एक प्रकार है जो केवल गर्भावस्था के दौरान होता है। इसमें महिला के खून में शुगर का स्तर (Blood Sugar Level) सामान्य से अधिक हो जाता है।

यदि इसका सही समय पर इलाज और नियंत्रण न किया जाए तो यह माँ और शिशु दोनों के लिए खतरे का कारण बन सकता है।








गर्भावधि मधुमेह क्या होता है? (What is Gestational Diabetes Mellitus?)

गर्भावधि मधुमेह (GDM) एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भावस्था के दौरान शरीर की इंसुलिन उपयोग करने की क्षमता कम हो जाती है। इंसुलिन शरीर में शुगर को ऊर्जा में बदलने का काम करता है। जब यह सही से काम नहीं करता, तो खून में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे मधुमेह की स्थिति उत्पन्न होती है।
यह समस्या आमतौर पर गर्भावस्था के 24वें से 28वें सप्ताह के बीच देखी जाती है।

गर्भावधि मधुमेह के कारण (Causes of Gestational Diabetes Mellitus)

  1. हार्मोनल परिवर्तन – गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा से निकलने वाले हार्मोन इंसुलिन की कार्यक्षमता को कम कर सकते हैं।
  2. परिवार में डायबिटीज का इतिहास – यदि परिवार में किसी को टाइप-2 डायबिटीज है तो GDM होने की संभावना बढ़ जाती है।
  3. अधिक वजन या मोटापा (Obesity) – मोटापे वाली महिलाओं को GDM होने का खतरा अधिक रहता है।
  4. उम्र – 30 वर्ष से अधिक उम्र की गर्भवती महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
  5. पिछली गर्भावस्था में GDM होना – यदि पहले गर्भ में यह समस्या हो चुकी है, तो दोबारा भी हो सकती है।
  6. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) – पीसीओएस वाली महिलाओं में यह जोखिम बढ़ जाता है।

गर्भावधि मधुमेह के लक्षण (Symptoms of Gestational Diabetes Mellitus)

अक्सर GDM के स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, लेकिन कुछ महिलाएँ इनमें से समस्याएँ महसूस कर सकती हैं:

  • बार-बार पेशाब लगना (Frequent Urination)
  • अधिक प्यास लगना (Excessive Thirst)
  • ज्यादा भूख लगना (Increased Hunger)
  • थकान और कमजोरी (Fatigue)
  • बार-बार संक्रमण होना (Recurrent Infections)
  • धुंधला दिखाई देना (Blurred Vision)

गर्भावधि मधुमेह का इलाज (Treatment of Gestational Diabetes Mellitus)

  1. ब्लड शुगर मॉनिटरिंग – नियमित रूप से खून की शुगर जाँच करें।
  2. संतुलित आहार (Balanced Diet) – फाइबर युक्त और कम शुगर वाला भोजन लें।
  3. व्यायाम और योग (Exercise & Yoga) – हल्की वॉक और योगासन से ब्लड शुगर नियंत्रण में रहता है।
  4. इंसुलिन इंजेक्शन – यदि डाइट और व्यायाम से शुगर नियंत्रित नहीं होता, तो डॉक्टर इंसुलिन लेने की सलाह दे सकते हैं।
  5. नियमित डॉक्टर चेकअप – गर्भावस्था के दौरान शुगर और बच्चे की स्थिति की निगरानी जरूरी है।

गर्भावधि मधुमेह से बचाव (Prevention of Gestational Diabetes Mellitus)

  • गर्भधारण से पहले और दौरान स्वस्थ वजन बनाए रखें।
  • संतुलित आहार लें, जिसमें फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज शामिल हों।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • मीठे और तैलीय खाद्य पदार्थों से बचें।
  • पर्याप्त नींद लें और तनाव कम रखें।

गर्भावधि मधुमेह के घरेलू उपाय (Home Remedies for Gestational Diabetes Mellitus)

ध्यान रहे कि घरेलू उपाय केवल सहायक (supportive) होते हैं। इन्हें डॉक्टर की सलाह के साथ ही अपनाएँ।

  1. मेथी के दाने (Fenugreek Seeds) – रातभर भिगोकर सुबह सेवन करने से शुगर कंट्रोल में मदद मिल सकती है।
  2. जामुन (Blackberry/Indian Black Plum) – इसका सेवन शुगर को नियंत्रित करने में सहायक है।
  3. गुड़मार (Gymnema Sylvestre) – यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी ब्लड शुगर को कम करने में मदद करती है।
  4. दालचीनी (Cinnamon) – दालचीनी का सेवन ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रख सकता है।

गर्भावधि मधुमेह में सावधानियाँ (Precautions in Gestational Diabetes Mellitus)

  • शुगर टेस्ट समय-समय पर करवाते रहें।
  • डॉक्टर द्वारा बताए गए आहार और दवाइयों का पालन करें।
  • खुद से कोई दवा या सप्लिमेंट न लें।
  • बच्चे की ग्रोथ और स्वास्थ्य पर नियमित नजर रखें।
  • डिलीवरी के बाद भी शुगर की जाँच करवाते रहें, क्योंकि भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा हो सकता है।

गर्भावधि मधुमेह को कैसे पहचाने? (How to Diagnose Gestational Diabetes Mellitus)

  • Oral Glucose Tolerance Test (OGTT) – इसमें ग्लूकोज ड्रिंक पिलाकर खून में शुगर लेवल मापा जाता है।
  • Fasting Blood Sugar Test – खाली पेट खून की जाँच की जाती है।
  • HbA1c Test – पिछले 2-3 महीनों की औसत शुगर लेवल बताता है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. क्या गर्भावधि मधुमेह डिलीवरी के बाद ठीक हो जाता है?
हाँ, अक्सर यह डिलीवरी के बाद ठीक हो जाता है, लेकिन भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

Q2. क्या GDM बच्चे को प्रभावित करता है?
हाँ, इससे बच्चे का वजन अधिक हो सकता है (Macrosomia), समय से पहले डिलीवरी हो सकती है, या जन्म के बाद शुगर लेवल कम हो सकता है।

Q3. क्या हर गर्भवती महिला को GDM होता है?
नहीं, यह केवल कुछ महिलाओं को ही प्रभावित करता है, जिनमें जोखिम अधिक होता है।

Q4. क्या GDM केवल इंसुलिन से ही नियंत्रित होता है?
नहीं, कई मामलों में डाइट और व्यायाम से ही यह कंट्रोल हो सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

गर्भावधि मधुमेह (Gestational Diabetes Mellitus) गर्भावस्था के दौरान होने वाली एक गंभीर स्थिति है, लेकिन समय पर पहचान, सही आहार, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। माँ और बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए शुगर लेवल पर नियमित निगरानी बहुत जरूरी है।


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