ग्लूकोमा (Glaucoma), जिसे हिंदी में काला मोतिया कहा जाता है, एक गंभीर नेत्र रोग है। यह रोग धीरे-धीरे आंखों की ऑप्टिक नर्व (Optic Nerve) को नुकसान पहुंचाता है और समय रहते इलाज न मिलने पर स्थायी अंधेपन (Permanent Blindness) का कारण बन सकता है। यह दुनिया भर में अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक है।
ग्लूकोमा क्या होता है? (What is Glaucoma?)
ग्लूकोमा एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंखों के अंदर का दबाव (Intraocular Pressure) बढ़ जाता है। यह दबाव ऑप्टिक नर्व को क्षतिग्रस्त कर देता है, जिससे धीरे-धीरे दृष्टि (Vision) कमजोर होती जाती है। कई बार यह बिना किसी शुरुआती लक्षण के भी विकसित होता है, इसलिए इसे "Silent Thief of Sight" कहा जाता है।
ग्लूकोमा के कारण (Causes of Glaucoma)
- आंखों में बढ़ा हुआ दबाव (Increased Eye Pressure)
- आनुवंशिक कारण (Genetic Factors) – परिवार में किसी को ग्लूकोमा होने पर खतरा बढ़ जाता है।
- उम्र बढ़ना (Aging) – 40 वर्ष से ऊपर अधिक जोखिम।
- मधुमेह (Diabetes) और हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension)।
- आंखों की चोट (Eye Injury) या संक्रमण।
- लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग (Long-term Steroid Use)।
- कॉर्निया और आईरिस की संरचना में असामान्यता (Abnormal Eye Structure)।
ग्लूकोमा के लक्षण (Symptoms of Glaucoma)
ग्लूकोमा का पता शुरुआती चरण में लगाना मुश्किल होता है, लेकिन कुछ लक्षण इस प्रकार हैं:
- धुंधला दिखाई देना (Blurred Vision)
- परिधीय दृष्टि का धीरे-धीरे कम होना (Gradual Loss of Peripheral Vision)
- आंखों में दर्द या दबाव (Eye Pain or Pressure)
- तेज रोशनी के चारों ओर रंगीन घेरा दिखना (Colored Halos Around Lights)
- सिरदर्द और मतली (Headache and Nausea)
- अचानक दृष्टि का कम होना (Sudden Vision Loss – Acute Glaucoma में)
ग्लूकोमा के प्रकार (Types of Glaucoma)
- ओपन एंगल ग्लूकोमा (Open Angle Glaucoma) – सबसे आम प्रकार, धीरे-धीरे बढ़ता है।
- एंगल क्लोजर ग्लूकोमा (Angle Closure Glaucoma) – अचानक बढ़ता दबाव, आपातकालीन स्थिति।
- नॉर्मल टेंशन ग्लूकोमा (Normal Tension Glaucoma) – सामान्य दबाव में भी ऑप्टिक नर्व को नुकसान।
- जन्मजात ग्लूकोमा (Congenital Glaucoma) – बच्चों में जन्म से मौजूद।
ग्लूकोमा का इलाज (Treatment of Glaucoma)
ग्लूकोमा का पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है, लेकिन समय पर उपचार से दृष्टि हानि को रोका जा सकता है।
- आई ड्रॉप्स (Eye Drops) – आंखों का दबाव कम करने के लिए।
- दवाइयाँ (Medications) – दबाव नियंत्रित करने के लिए।
- लेजर उपचार (Laser Therapy) – अतिरिक्त द्रव (Fluid) को बाहर निकालने के लिए।
- सर्जरी (Surgery/Trabeculectomy, Drainage Implants) – गंभीर मामलों में।
ग्लूकोमा को कैसे रोके (Prevention of Glaucoma)
- नियमित नेत्र जांच करवाएँ (Regular Eye Check-up)
- डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें
- आंखों को चोट से बचाएँ
- आंखों की स्वच्छता बनाए रखें
- लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड न लें
ग्लूकोमा के घरेलू उपाय (Home Remedies for Glaucoma)
ग्लूकोमा का इलाज केवल डॉक्टर द्वारा किया जा सकता है, लेकिन कुछ घरेलू उपाय सहायक हो सकते हैं:
- हरी पत्तेदार सब्जियाँ, गाजर, पालक और विटामिन A युक्त आहार लें
- हरी चाय (Green Tea) और एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार उपयोग करें
- आंखों पर अधिक तनाव न डालें
- योग और प्राणायाम से तनाव कम करें
- धूम्रपान और शराब से बचें
सावधानियाँ (Precautions)
- अचानक दृष्टि धुंधली होने पर तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से मिलें
- नियमित आंखों का प्रेशर टेस्ट करवाएँ
- डॉक्टर की दी गई आई ड्रॉप्स समय पर डालें
- परिवार में किसी को ग्लूकोमा है तो जांच जरूर कराएँ
ग्लूकोमा कैसे पहचाने (How to Identify Glaucoma)
- नेत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा Tonometry Test से आंखों का दबाव मापा जाता है।
- Ophthalmoscopy से ऑप्टिक नर्व की जांच की जाती है।
- Visual Field Test से दृष्टि का दायरा चेक किया जाता है।
- Optical Coherence Tomography (OCT) से नर्व फाइबर की मोटाई जांची जाती है।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. क्या ग्लूकोमा का इलाज संभव है?
नहीं, इसे पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन सही उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
Q2. ग्लूकोमा का सबसे बड़ा खतरा क्या है?
इसका सबसे बड़ा खतरा स्थायी अंधापन (Permanent Blindness) है।
Q3. क्या बच्चों को भी ग्लूकोमा हो सकता है?
हाँ, जन्मजात (Congenital Glaucoma) बच्चों में भी पाया जाता है।
Q4. ग्लूकोमा का पता लगाने का सबसे आसान तरीका क्या है?
नियमित नेत्र जांच और टोनोमेट्री टेस्ट।
निष्कर्ष (Conclusion)
ग्लूकोमा एक गंभीर और जीवनभर का नेत्र रोग है, जो धीरे-धीरे दृष्टि को प्रभावित करता है और यदि समय रहते इलाज न किया जाए तो स्थायी अंधेपन का कारण बन सकता है। नियमित आंखों की जांच, संतुलित जीवनशैली, स्वस्थ आहार और समय पर दवाइयाँ लेकर इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है।
