ग्लॉसोप्टोसिस (Glossoptosis) एक जन्मजात (Congenital) स्थिति है, जिसमें शिशु की जीभ (Tongue) असामान्य रूप से पीछे की ओर खिसक जाती है। यह समस्या अक्सर सांस लेने (Breathing) और खाने (Feeding) में कठिनाई पैदा करती है। यह स्थिति अकेले भी हो सकती है, लेकिन ज़्यादातर यह पियरे रॉबिन सीक्वेंस (Pierre Robin Sequence) या अन्य क्रेनियोफेशियल असामान्यताओं (Craniofacial Abnormalities) के साथ देखी जाती है।
ग्लॉसोप्टोसिस क्या होता है (What is Glossoptosis)
ग्लॉसोप्टोसिस में जीभ का पिछला हिस्सा गले की ओर गिर जाता है, जिससे वायुमार्ग (Airway) अवरुद्ध हो सकता है। इससे शिशु को सांस लेने में कठिनाई होती है और कई बार घुटन (Choking) जैसी स्थिति भी बन सकती है।
ग्लॉसोप्टोसिस के कारण (Causes of Glossoptosis)
- जन्मजात असामान्यता (Congenital Abnormality) – भ्रूण के विकास के दौरान जीभ और जबड़े की संरचना का सही से न बनना।
- पियरे रॉबिन सीक्वेंस (Pierre Robin Sequence) – इसमें माइक्रोग्नैथिया (Micrognathia – छोटा निचला जबड़ा), क्लेफ्ट पैलेट (Cleft palate – तालु में छेद) और ग्लॉसोप्टोसिस एक साथ पाए जाते हैं।
- जेनेटिक कारण (Genetic Causes) – कुछ दुर्लभ आनुवंशिक विकार।
- अन्य क्रेनियोफेशियल सिंड्रोम्स (Other Craniofacial Syndromes) – जैसे Stickler syndrome या Treacher Collins syndrome।
ग्लॉसोप्टोसिस के लक्षण (Symptoms of Glossoptosis)
- सांस लेने में कठिनाई (Breathing difficulty)
- नींद के दौरान बार-बार सांस रुकना (Sleep apnea)
- दूध पीते समय घुटन या खाँसी आना (Choking while feeding)
- नाक के पास आवाज़ आना (Noisy breathing)
- बार-बार नीला पड़ना (Cyanosis)
- वजन न बढ़ना (Failure to thrive)
ग्लॉसोप्टोसिस को कैसे पहचाने (How to Diagnose Glossoptosis)
- क्लिनिकल जांच (Clinical examination) – डॉक्टर शिशु की जीभ और जबड़े की स्थिति देखते हैं।
- पल्स ऑक्सीमीटर टेस्ट (Pulse oximetry test) – ऑक्सीजन स्तर की जाँच।
- स्लीप स्टडी (Sleep study/Polysomnography) – नींद के दौरान सांस रुकने का पता लगाना।
- सीटी स्कैन / एमआरआई (CT scan / MRI) – गले और जबड़े की संरचना का अध्ययन।
ग्लॉसोप्टोसिस का इलाज (Treatment of Glossoptosis)
- पोजिशनल थैरेपी (Positional Therapy) – बच्चे को पेट के बल या साइड में सुलाना ताकि जीभ आगे की ओर रहे।
- फीडिंग टेक्निक (Feeding techniques) – विशेष बोतल या चम्मच का प्रयोग।
- नाक में ट्यूब (Nasopharyngeal airway) – सांस का रास्ता खुला रखने के लिए।
- सर्जरी (Surgery)
- टंग-लिप अटैचमेंट (Tongue-lip adhesion)
- मेंडिबुलर डिस्ट्रैक्शन ऑस्टियोजेनेसिस (Mandibular distraction osteogenesis – जबड़े की हड्डी बढ़ाना)
- ट्रेकियोस्टॉमी (Tracheostomy – गंभीर मामलों में सांस की नली बनाना)।
ग्लॉसोप्टोसिस को कैसे रोके (Prevention of Glossoptosis)
चूँकि यह जन्मजात स्थिति है, इसलिए इसे पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। लेकिन –
- गर्भावस्था के दौरान प्रेगनेंसी केयर (Antenatal care) लेना
- जेनेटिक काउंसलिंग (Genetic counseling) कराना
- नियमित अल्ट्रासाउंड जाँच करवाना
इसकी संभावना को कम कर सकता है।
घरेलू उपाय (Home Remedies for Glossoptosis)
- बच्चे को पेट के बल सुलाना या करवट देकर लिटाना।
- फीडिंग के समय बच्चे को सीधा बैठाकर दूध पिलाना।
- बच्चे के वजन और सांस पर निगरानी रखना।
- कोई भी घरेलू उपाय केवल डॉक्टर की सलाह के साथ ही करना चाहिए।
सावधानियाँ (Precautions for Glossoptosis)
- बच्चे को हमेशा निगरानी में रखें।
- दूध पिलाते समय घुटन या खाँसी पर तुरंत प्रतिक्रिया दें।
- नीला पड़ने (cyanosis) या सांस रुकने की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- नींद के दौरान शिशु की पोजिशन पर ध्यान दें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या ग्लॉसोप्टोसिस खतरनाक होता है?
हाँ, यदि इसका समय पर इलाज न हो तो यह जानलेवा भी हो सकता है क्योंकि बच्चा सांस नहीं ले पाता।
प्रश्न 2: क्या यह समस्या केवल बच्चों में होती है?
ज़्यादातर यह जन्मजात होती है और शिशुओं में देखी जाती है, लेकिन कुछ मामलों में अन्य कारणों से बड़े होने पर भी सांस की समस्या हो सकती है।
प्रश्न 3: क्या ग्लॉसोप्टोसिस का इलाज संभव है?
हाँ, सही देखभाल और जरूरत पड़ने पर सर्जरी से इसे नियंत्रित और ठीक किया जा सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
ग्लॉसोप्टोसिस (Glossoptosis) एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य स्थिति है, जिसमें शिशु की जीभ पीछे की ओर खिसक जाती है और सांस लेने तथा खाने में कठिनाई होती है। इसका इलाज पोजिशनल थैरेपी, फीडिंग तकनीक, और गंभीर मामलों में सर्जरी से किया जाता है। माता-पिता को शिशु की निगरानी करते रहना चाहिए और किसी भी सांस संबंधी समस्या पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
