ग्लूकोज-6-फॉस्फेट डिहाइड्रोजनेज़ की कमी (Glucose-6-Phosphate Dehydrogenase Deficiency) जिसे संक्षेप में G6PD deficiency कहा जाता है, एक आनुवंशिक (genetic) विकार है। इसमें शरीर की लाल रक्त कोशिकाएँ (Red Blood Cells) समय से पहले नष्ट होने लगती हैं। इस स्थिति को हेमोलिटिक एनीमिया (Hemolytic Anemia) भी कहा जाता है। यह समस्या तब अधिक गंभीर हो जाती है जब व्यक्ति कुछ दवाइयाँ, संक्रमण (infection), या कुछ विशेष खाद्य पदार्थ जैसे फावा बीन्स (Fava Beans) का सेवन करता है।
Glucose-6-Phosphate Dehydrogenase Deficiency क्या होता है (What is G6PD Deficiency?)
G6PD deficiency में शरीर में Glucose-6-Phosphate Dehydrogenase नामक एंजाइम की कमी होती है। यह एंजाइम लाल रक्त कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (oxidative stress) से बचाता है। जब यह एंजाइम पर्याप्त मात्रा में नहीं होता, तो लाल रक्त कोशिकाएँ टूटने लगती हैं और व्यक्ति को एनीमिया (anemia) हो जाता है।
Glucose-6-Phosphate Dehydrogenase Deficiency कारण (Causes of G6PD Deficiency)
- आनुवंशिक कारण (Genetic Cause): यह X-लिंक्ड जीन (X-linked gene) से संबंधित होता है और अधिकतर पुरुषों में पाया जाता है।
- संक्रमण (Infections): कुछ संक्रमण लाल रक्त कोशिकाओं को तोड़ने का कारण बन सकते हैं।
- दवाइयाँ (Medicines):
- एंटी-मलेरियल दवाएँ
- कुछ एंटीबायोटिक्स (जैसे सल्फोनामाइड्स)
- पेनिसिलिन
- खाद्य पदार्थ (Foods):
- फावा बीन्स (Fava beans)
- कुछ कृत्रिम रसायन (जैसे नेफ्थलीन, जो नेफ़थलीन बॉल्स में पाया जाता है)।
Glucose-6-Phosphate Dehydrogenase Deficiency के लक्षण (Symptoms of G6PD Deficiency)
- थकान (Fatigue)
- त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (Jaundice)
- सांस फूलना (Shortness of breath)
- गहरा रंग का मूत्र (Dark urine)
- दिल की धड़कन तेज होना (Rapid heartbeat)
- बार-बार संक्रमण होना
- सिरदर्द और चक्कर आना
Glucose-6-Phosphate Dehydrogenase Deficiency कैसे पहचाने (Diagnosis of G6PD Deficiency)
- ब्लड टेस्ट (Blood test):
- हीमोग्लोबिन की जाँच
- रेटिकुलोसाइट काउंट
- G6PD एंजाइम एक्टिविटी टेस्ट
- क्लिनिकल हिस्ट्री (Clinical History):
- परिवार में इस रोग का इतिहास
- लक्षणों का विश्लेषण
Glucose-6-Phosphate Dehydrogenase Deficiency इलाज (Treatment of G6PD Deficiency)
इसका कोई स्थायी इलाज (permanent cure) उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
- ट्रिगर्स से बचाव (Avoiding triggers):
- हानिकारक दवाइयों और फूड्स से दूर रहना
- संक्रमण का इलाज (Treating infections):
- एंटीबायोटिक या अन्य दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह से लेना
- गंभीर स्थिति में (In severe cases):
- ब्लड ट्रांसफ्यूजन (रक्त आधान) की आवश्यकता हो सकती है।
Glucose-6-Phosphate Dehydrogenase Deficiency कैसे रोके उसे (Prevention of G6PD Deficiency)
- डॉक्टर द्वारा निषिद्ध दवाइयों से बचें।
- फावा बीन्स और उससे बने खाद्य पदार्थ न खाएँ।
- नेफ़थलीन जैसे रसायनों से दूरी बनाए रखें।
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराएँ।
- संक्रमण होने पर तुरंत इलाज कराएँ।
घरेलू उपाय (Home Remedies for G6PD Deficiency)
- संतुलित आहार (Balanced diet):
- विटामिन और आयरन युक्त भोजन करें।
- हाइड्रेशन (Hydration):
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि मूत्र साफ रहे।
- प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएँ (Boost immunity):
- ताजे फल और सब्जियों का सेवन करें।
- आराम (Rest):
- थकान से बचने के लिए पर्याप्त नींद लें।
सावधानियाँ (Precautions)
- बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न लें।
- बच्चों को नेफ़थलीन बॉल्स और हानिकारक रसायनों से दूर रखें।
- गर्भवती महिलाएँ, जिनके परिवार में G6PD deficiency है, वे नवजात शिशु की स्क्रीनिंग अवश्य कराएँ।
- नियमित ब्लड टेस्ट करवाते रहें।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न 1: क्या G6PD deficiency का पूरी तरह इलाज संभव है?
उत्तर: इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन जीवनशैली में बदलाव और सावधानी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
प्रश्न 2: क्या यह केवल पुरुषों में ही होता है?
उत्तर: यह अधिकतर पुरुषों में पाया जाता है, लेकिन महिलाएँ भी कैरियर हो सकती हैं या लक्षण विकसित कर सकती हैं।
प्रश्न 3: क्या G6PD deficiency जीवनभर रहता है?
उत्तर: हाँ, यह एक आनुवंशिक स्थिति है और जीवनभर बनी रहती है।
प्रश्न 4: क्या बच्चे में जन्म के समय यह पता लगाया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, नवजात शिशु की स्क्रीनिंग से इसे आसानी से पहचाना जा सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
Glucose-6-Phosphate Dehydrogenase Deficiency (G6PD deficiency) एक आनुवंशिक विकार है जो लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही आहार, सावधानियाँ, और डॉक्टर की सलाह से व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। समय पर पहचान और प्रबंधन से जटिलताओं से बचा जा सकता है।
