Khushveer Choudhary

Legg-Calve-Perthes Disease: कारण, लक्षण, उपचार, रोकथाम और सावधानियाँ

लेग-कैल्वे-पर्थेस रोग (Legg-Calve-Perthes Disease) बच्चों में पाया जाने वाला एक हड्डियों का विकार (bone disorder) है जो कूल्हे के जोड़ (hip joint) को प्रभावित करता है।

इस स्थिति में जांघ की हड्डी (femur) के ऊपरी हिस्से की सिर जैसी संरचना (femoral head) में रक्त प्रवाह (blood supply) अस्थायी रूप से बाधित हो जाता है, जिसके कारण वह हड्डी धीरे-धीरे कमजोर होकर मरने (necrosis) लगती है।
यह रोग एवस्कुलर नेक्रोसिस ऑफ द फेमोरल हेड (Avascular necrosis of femoral head in children) के नाम से भी जाना जाता है।

यह आमतौर पर 4 से 10 वर्ष की उम्र के बच्चों में होता है और लड़कों में लड़कियों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक पाया जाता है।









लेग-कैल्वे-पर्थेस रोग क्या है  (What is Legg-Calve-Perthes Disease)

इस रोग में जांघ की हड्डी के सिर (femoral head) तक रक्त की आपूर्ति रुक जाती है।
जब रक्त प्रवाह बाधित होता है, तो हड्डी के ऊतक (bone tissue) मरने लगते हैं — इसे एवस्कुलर नेक्रोसिस (avascular necrosis) कहा जाता है।
समय के साथ शरीर उस मृत हड्डी को धीरे-धीरे अवशोषित करता है और उसकी जगह नई हड्डी बनाता है, लेकिन यह प्रक्रिया असामान्य तरीके से होने पर कूल्हे के जोड़ का आकार बिगड़ सकता है, जिससे बच्चे को दर्द, लंगड़ापन और गतिशीलता की समस्या होती है।

लेग-कैल्वे-पर्थेस रोग कारण (Causes of Legg-Calve-Perthes Disease)

इस रोग का सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जाता है कि यह कूल्हे की हड्डी तक रक्त प्रवाह में अस्थायी कमी (temporary loss of blood supply to the femoral head) के कारण होता है।

संभावित कारणों में शामिल हैं:

  • विकास के दौरान रक्त वाहिकाओं का अवरोध (blockage of blood vessels)
  • आनुवंशिक प्रवृत्ति (genetic predisposition)
  • हॉर्मोनल असंतुलन (hormonal imbalance)
  • कोएगुलेशन विकार (blood clotting disorders)
  • बार-बार चोट लगना (repeated trauma to hip)
  • पोषण की कमी (malnutrition)

लेग-कैल्वे-पर्थेस रोग लक्षण (Symptoms of Legg-Calve-Perthes Disease)

LCPD के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और प्रारंभिक चरण में मामूली दर्द के रूप में दिखाई देते हैं।

मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • कूल्हे या जांघ में दर्द (pain in hip, thigh or groin)
  • लंगड़ाकर चलना (limping)
  • घुटने में दर्द (knee pain) – हालांकि समस्या कूल्हे में होती है
  • जोड़ की कठोरता (stiffness in hip joint)
  • कूल्हे की गति में कमी (limited range of motion)
  • एक पैर का छोटा लगना (apparent leg shortening)
  • गतिविधियों में परेशानी, जैसे दौड़ना या बैठना

रोग के चरण (Stages of Legg-Calve-Perthes Disease)

यह रोग कई महीनों या वर्षों में विकसित होता है और इसके चार प्रमुख चरण होते हैं:

  1. नेक्रोसिस चरण (Necrosis stage):
    1. रक्त प्रवाह रुकने से हड्डी मरने लगती है।
  2. फ्रैग्मेंटेशन चरण (Fragmentation stage):
    1. मृत हड्डी टूटने लगती है और शरीर नई हड्डी बनाना शुरू करता है।
  3. रीऑसिफिकेशन चरण (Reossification stage):
    1. नई हड्डी बनने की प्रक्रिया चलती है।
  4. हीलिंग चरण (Healing stage):
    1. हड्डी की मरम्मत पूरी होती है, लेकिन आकार सामान्य से भिन्न हो सकता है।

निदान (Diagnosis of Legg-Calve-Perthes Disease)

इस रोग का निदान शारीरिक जांच और इमेजिंग टेस्ट के माध्यम से किया जाता है।

  1. फिजिकल एग्जामिनेशन:

    1. डॉक्टर बच्चे के चलने, बैठने और जोड़ की गति की जांच करता है।
  2. एक्स-रे (X-ray):

    1. कूल्हे की हड्डी के आकार और नेक्रोसिस के स्तर का पता चलता है।
  3. एमआरआई (MRI):

    1. प्रारंभिक अवस्था में रक्त प्रवाह की स्थिति देखने में सहायक।
  4. CT स्कैन:

    1. हड्डी के सटीक ढांचे और जोड़ की विकृति का आकलन।

उपचार (Treatment of Legg-Calve-Perthes Disease)

उपचार का उद्देश्य फेमोरल हेड को जितना संभव हो गोल और सही आकार में बनाए रखना और जोड़ की कार्यक्षमता बनाए रखना है।

उपचार रोग की अवस्था, बच्चे की उम्र और हड्डी की क्षति की मात्रा पर निर्भर करता है।

1. गैर-सर्जिकल उपचार (Non-surgical Treatment)

  • आराम (Rest):
    अत्यधिक गतिविधियों से बचना।
  • फिजियोथेरेपी (Physiotherapy):
    मांसपेशियों की लचीलापन और जोड़ की गति बढ़ाने के लिए।
  • ब्रैस या कास्ट (Braces or Casts):
    फेमोरल हेड को सॉकेट में सही स्थिति में रखने के लिए।
  • दर्द निवारक दवाएँ (Pain relievers):
    जैसे इबुप्रोफेन या पैरासिटामोल।

2. सर्जिकल उपचार (Surgical Treatment)

यदि रोग आगे बढ़ गया है या जोड़ का आकार बिगड़ गया है, तो सर्जरी की जाती है।

  • ऑस्टियोटॉमी (Osteotomy):
    फेमर या पेल्विस को काटकर जोड़ को सही स्थिति में लाना।
  • फेमोरल हेड रीशेपिंग:
    विकृत हड्डी को फिर से गोल आकार देना।
  • हिप रिप्लेसमेंट (Hip replacement):
    गंभीर मामलों में वयस्क अवस्था में किया जा सकता है।

जटिलताएँ (Complications)

  • स्थायी कूल्हे की विकृति (permanent hip deformity)
  • जोड़ का आर्थराइटिस (hip arthritis)
  • पैरों की लंबाई में अंतर (leg length discrepancy)
  • गतिशीलता में कमी (limited mobility)

रोकथाम (Prevention)

  • इसका सटीक रोकथाम तरीका ज्ञात नहीं है क्योंकि यह रक्त प्रवाह की आंतरिक समस्या से जुड़ा है।
  • परंतु पोषक आहार, नियमित व्यायाम, और कूल्हे पर अत्यधिक दबाव से बचना मददगार हो सकता है।
  • बच्चे को बार-बार गिरने या चोट लगने से बचाएँ।

सावधानियाँ (Precautions)

  • बच्चे को अधिक दौड़ने या कूदने से रोकें।
  • फिजियोथेरेपिस्ट के निर्देशों का पालन करें।
  • वजन नियंत्रित रखें ताकि कूल्हे पर अधिक दबाव न पड़े।
  • नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवाएँ।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1: क्या लेग-कैल्वे-पर्थेस रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है?
उत्तर: हाँ, कई मामलों में यदि रोग समय पर पहचान लिया जाए और सही इलाज हो, तो हड्डी दोबारा सामान्य आकार में बन सकती है।

प्रश्न 2: क्या यह रोग केवल बच्चों में होता है?
उत्तर: हाँ, यह मुख्यतः 4 से 10 वर्ष के बच्चों में पाया जाता है।

प्रश्न 3: क्या सर्जरी हर मामले में जरूरी होती है?
उत्तर: नहीं, शुरुआती चरण में अधिकांश मामलों में फिजियोथेरेपी और आराम से ही सुधार हो सकता है।

प्रश्न 4: क्या यह रोग फिर से हो सकता है?
उत्तर: एक ही कूल्हे में आमतौर पर दोबारा नहीं होता, लेकिन कुछ मामलों में दोनों कूल्हों को प्रभावित कर सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

लेग-कैल्वे-पर्थेस रोग (Legg-Calve-Perthes Disease) बच्चों में पाया जाने वाला एक जटिल लेकिन प्रबंधनीय हड्डी रोग है।
यदि समय पर निदान और सही उपचार किया जाए, तो बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है और कूल्हे की कार्यक्षमता को बनाए रख सकता है।
माता-पिता को चाहिए कि बच्चे में लंगड़ापन या कूल्हे के दर्द के लक्षण दिखते ही विशेषज्ञ से संपर्क करें ताकि रोग आगे न बढ़े।


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