Oral Fibroma (ओरल फाइब्रोमा) मुँह के अंदर होने वाला एक सामान्य, गैर-कैंसरयुक्त (Benign) ऊतक का बढ़ना है। यह मुख्य रूप से मुँह की अंदरूनी लाइन, जीभ, होंठ, गाल या मसूड़ों पर छोटे, कठोर गांठ के रूप में दिखाई देता है। यह गांठ अक्सर दर्दरहित होती है लेकिन कभी-कभी खाने-पीने या बोलने में असुविधा पैदा कर सकती है।
Oral Fibroma का कारण आमतौर पर स्थानीय आघात (local trauma) या दस्ताने के बिना रगड़ होती है।
Oral Fibroma क्या होता है? (What is Oral Fibroma?)
Oral Fibroma मुँह के ऊतक में फाइब्रोब्लास्ट (Fibroblast) नामक कोशिकाओं का असामान्य रूप से बढ़ना होता है। यह गांठ आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ती है और कुछ सेंटीमीटर तक हो सकती है। यह कैंसर नहीं होता और न ही संक्रमित होता है, लेकिन इसे अनदेखा करने पर आकार बढ़ सकता है।
मुख्य तथ्य:
- यह गैर-कैंसरयुक्त (Benign) होता है।
- सामान्यतः 1–2 सेमी तक आकार में रहता है।
- अधिकतर दांत, मसूड़े या होंठ के लगातार रगड़ या चोट के कारण होता है।
Oral Fibroma के कारण (Causes of Oral Fibroma)
Oral Fibroma के मुख्य कारण हैं:
- दांत या ब्रेसेस का रगड़ (Trauma from teeth or braces)
- गलत दांत साफ करने की आदत (Aggressive tooth brushing)
- मुँह के किसी हिस्से पर बार-बार चोट (Repeated injury inside mouth)
- थोड़ी बहुत अनियमित मुँह की संरचना (Abnormal oral anatomy)
अन्य कारणों में दुर्लभ रूप से हार्मोनल बदलाव या आनुवंशिक प्रवृत्ति भी शामिल हो सकती है।
Oral Fibroma के लक्षण (Symptoms of Oral Fibroma)
Oral Fibroma के लक्षण धीरे-धीरे दिखाई देते हैं और यह आमतौर पर दर्दरहित होता है।
मुख्य लक्षण:
- मुँह के अंदर छोटी, गोल, कठोर गांठ (Small, round, firm nodule)
- सफेद या गुलाबी रंग की गांठ
- खाने या बोलने में कभी-कभी हल्की असुविधा (Mild discomfort while eating or speaking)
- चोट लगने पर हल्का दर्द या सूजन (Mild pain if irritated)
- आमतौर पर यह धीरे-धीरे बढ़ती है (Slow growth)
Oral Fibroma कैसे पहचाने (How to Identify Oral Fibroma)
- दांतों और मसूड़ों की नियमित जांच (Routine dental checkup)
- दांत के रगड़ या ब्रेसेस के संपर्क में गांठ का निरीक्षण
- डेंटल एक्स-रे या बायोप्सी (Dental X-ray or Biopsy) – यदि डॉक्टर को गांठ संदिग्ध लगे
- गांठ की स्थिरता और रंग का निरीक्षण (Observation of firmness and color)
Oral Fibroma का इलाज (Treatment of Oral Fibroma)
Oral Fibroma आमतौर पर सर्जिकल रूप से हटाया जाता है।
इलाज के तरीके:
- सर्जिकल एक्सीजन (Surgical Excision) – सबसे सामान्य तरीका
- लेजर थेरपी (Laser Therapy) – कुछ मामलों में लेजर का उपयोग किया जा सकता है
- दांतों या ब्रेसेस की वजह से हो रहा तनाव हटाना (Eliminate cause of trauma)
ध्यान दें: इलाज के बाद गांठ के दोबारा होने की संभावना कम होती है, लेकिन अगर कारण वही रहे तो पुनः बढ़ सकती है।
Oral Fibroma कैसे रोके (Prevention of Oral Fibroma)
- दांतों और मसूड़ों की सही देखभाल (Proper oral hygiene)
- अत्यधिक कठोर ब्रशिंग से बचें (Avoid aggressive brushing)
- ब्रैसेस या दांतों की चोट से बचें (Prevent trauma from braces or teeth)
- संतुलित आहार और विटामिन युक्त भोजन (Balanced diet with vitamins)
- मुँह की नियमित जाँच (Regular dental checkups)
Oral Fibroma के घरेलू उपाय (Home Remedies)
गांठ को छोटे स्तर पर आराम देने और संक्रमण रोकने के लिए:
- गर्म पानी से कुल्ला (Warm salt water rinse)
- मुँह की स्वच्छता बनाए रखना (Maintain oral hygiene)
- तीव्र या कठोर भोजन से बचना (Avoid hard or sharp foods)
ध्यान दें: घरेलू उपाय केवल सहायक हैं; सर्जिकल हटाने की जरूरत अक्सर होती है।
Oral Fibroma में सावधानियाँ (Precautions)
- गांठ को बार-बार न छेड़े या दबाए
- दांत या मसूड़ों पर अतिरिक्त चोट से बचें
- किसी भी बदलाव या वृद्धि पर डेंटल डॉक्टर से तुरंत जांच करवाएँ
- सर्जरी के बाद डॉक्टर द्वारा बताई गई देखभाल का पालन करें
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. Oral Fibroma कैंसर है या नहीं?
नहीं, यह आमतौर पर गैर-कैंसरयुक्त (Benign) होता है।
Q2. Oral Fibroma खुद ही ठीक हो सकता है?
अधिकतर मामलों में गांठ खुद नहीं जाती, इसलिए डॉक्टर से हटवाना जरूरी है।
Q3. Oral Fibroma बच्चों में हो सकता है?
हाँ, बच्चों में भी हो सकता है, खासकर अगर दांतों की चोट या बार-बार चोट लगी हो।
Q4. Oral Fibroma बार-बार क्यों होता है?
अगर मूल कारण यानी दांत या ब्रेसेस की चोट बनी रहती है, तो यह दोबारा हो सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
Oral Fibroma एक सामान्य, गैर-कैंसरयुक्त मुँह का ऊतक बढ़ना है जो अक्सर चोट या रगड़ के कारण होता है। समय पर पहचान और सर्जिकल इलाज से इसे पूरी तरह हटाया जा सकता है। मुँह की स्वच्छता, सही दांतों की देखभाल और नियमित डेंटल जांच इस रोग से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।