Khushveer Choudhary

Sjögren Syndrome लक्षण, कारण, उपचार और घरेलू उपाय

​शोग्रेन सिंड्रोम (Sjögren Syndrome) एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (Autoimmune Disorder) है। इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) गलती से अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं, विशेष रूप से नमी पैदा करने वाली ग्रंथियों (Moisture-producing glands) पर हमला करने लगती है। इसके परिणामस्वरूप आँखों और मुँह में सूखापन आ जाता है। यह अक्सर अन्य प्रतिरक्षा रोगों, जैसे संधिशोथ (Rheumatoid Arthritis) या ल्यूपस (Lupus) के साथ विकसित होता है।

​शोग्रेन सिंड्रोम क्या होता है? (What is Sjögren Syndrome?)

​शोग्रेन सिंड्रोम मुख्य रूप से लार ग्रंथियों (Salivary glands) और अश्रु ग्रंथियों (Tear glands) को प्रभावित करता है। इसके कारण लार और आँसुओं का बनना कम हो जाता है। यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन यह 40 से 50 वर्ष की महिलाओं में अधिक देखी जाती है।

​शोग्रेन सिंड्रोम के लक्षण (Symptoms of Sjögren Syndrome)

​इसके दो सबसे मुख्य लक्षण हैं:

​1. आँखों का सूखापन (Dry Eyes)

  • ​आँखों में जलन या खुजली महसूस होना।
  • ​आँखों में किरकिरापन या रेत जैसा महसूस होना।
  • ​रोशनी के प्रति संवेदनशीलता (Light sensitivity)।

​2. मुँह का सूखापन (Dry Mouth)

  • ​ऐसा महसूस होना कि मुँह कपास (Cotton) से भरा है।
  • ​निगलने या बोलने में कठिनाई।
  • ​स्वाद में बदलाव या बार-बार प्यास लगना।
  • ​सूखी खांसी या गले में खराश।

​3. अन्य लक्षण (Other Symptoms)

  • जोड़ों का दर्द (Joint Pain): जोड़ों में सूजन और अकड़न।
  • त्वचा का सूखापन (Dry Skin): त्वचा पर चकत्ते या रूखापन।
  • योनि का सूखापन (Vaginal Dryness): महिलाओं में विशेष समस्या।
  • थकान (Fatigue): बिना किसी कारण के बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना।

​शोग्रेन सिंड्रोम के कारण (Causes of Sjögren Syndrome)

​वैज्ञानिक अभी तक इसके सटीक कारण का पता नहीं लगा पाए हैं, लेकिन कुछ कारक इसकी संभावना बढ़ा देते हैं:

  • आनुवंशिकी (Genetics): कुछ जीन व्यक्ति को इस बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं।
  • वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण: कुछ खास तरह के संक्रमण इम्यून सिस्टम को ट्रिगर कर सकते हैं।
  • हार्मोनल कारक: महिलाओं में इसकी अधिकता होने के कारण एस्ट्रोजन हार्मोन की भूमिका मानी जाती है।

शोग्रेन सिंड्रोम ​कैसे पहचानें? (How to Identify/Diagnosis?)

​शोग्रेन सिंड्रोम की पहचान के लिए डॉक्टर निम्नलिखित परीक्षण कर सकते हैं:

  • शिर्मर टेस्ट (Schirmer Test): आँखों में आंसू बनने की क्षमता को मापने के लिए।
  • स्लिट लैंप टेस्ट (Slit Lamp Test): आँखों की सतह के सूखेपन की जांच के लिए।
  • लार ग्रंथि बायोप्सी (Salivary Gland Biopsy): होंठ के अंदर के ऊतकों की जांच।
  • रक्त परीक्षण (Blood Tests): एंटी-एसएसए (Anti-SSA) और एंटी-एसएसबी (Anti-SSB) एंटीबॉडीज की जांच।

​शोग्रेन सिंड्रोम इलाज (Treatment of Sjögren Syndrome)

​इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन लक्षणों को दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है:

  • आई ड्रॉप्स (Eye Drops): कृत्रिम आँसू (Artificial tears) जो आँखों की नमी बनाए रखते हैं।
  • लार बढ़ाने वाली दवाएं: जैसे पाइलोकार्पिन (Pilocarpine)।
  • इम्युनोसप्रेसेन्ट्स: इम्यून सिस्टम की सक्रियता को कम करने वाली दवाएं।
  • NSAIDs: जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने के लिए।

​घरेलू उपाय (Home Remedies)

  • तरल पदार्थों का सेवन: बार-बार पानी पिएं ताकि मुँह नम रहे।
  • शुगर-फ्री गम (Sugar-free Gum): यह लार के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है।
  • ह्यूमिडिफायर (Humidifier): घर के अंदर की हवा को नम रखें ताकि आँखों और नाक में सूखापन न आए।
  • नियमित सफाई: मुँह सूखने से दांत खराब होने का खतरा बढ़ता है, इसलिए दिन में दो बार ब्रश करें।
  • खट्टे फल: नींबू या संतरा लार ग्रंथियों को सक्रिय कर सकते हैं।

​सावधानियाँ (Precautions)

  • धूम्रपान छोड़ें: धुआं आँखों और मुँह के सूखेपन को बदतर बनाता है।
  • ज्यादा कॉफी से बचें: कैफीन शरीर को डिहाइड्रेट कर सकता है।
  • तेज धूप और हवा: बाहर निकलते समय चश्मा पहनें ताकि आँखों की नमी न उड़े।

​अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या शोग्रेन सिंड्रोम जानलेवा है?

आमतौर पर यह जानलेवा नहीं है, लेकिन यदि इसका इलाज न किया जाए, तो यह गुर्दे, फेफड़ों या लिम्फ नोड्स (कैंसर का एक दुर्लभ प्रकार) को प्रभावित कर सकता है।

2. क्या यह केवल महिलाओं को होता है?

नहीं, लेकिन 10 में से 9 मरीज़ महिलाएं ही होती हैं।

3. क्या इसमें आहार का कोई महत्व है?

हाँ, एंटी-इंफ्लेमेटरी आहार (जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड) जोड़ों के दर्द में मदद कर सकता है।

​निष्कर्ष (Conclusion)

​शोग्रेन सिंड्रोम एक दीर्घकालिक स्थिति है जो दैनिक जीवन को चुनौतीपूर्ण बना सकती है। हालांकि, सही दवा और जीवनशैली में बदलाव के साथ मरीज़ एक सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। यदि आपको लगातार आँखों और मुँह में सूखेपन की समस्या है, तो इसे सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ न करें।

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