Khushveer Choudhary

Sleeping Sickness कारण, लक्षण, इलाज और बचाव के तरीके

 ​स्लीपिंग सिकनेस (Sleeping Sickness) एक गंभीर और घातक परजीवी रोग (Parasitic Disease) है। यह मुख्य रूप से उप-सहारा अफ्रीका (Sub-Saharan Africa) के ग्रामीण इलाकों में पाया जाता है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह मस्तिष्क को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है और अंततः मृत्यु का कारण बन सकता है। यह बीमारी 'त्से-त्से' (Tsetse) नाम की मक्खी के काटने से फैलती है।

​स्लीपिंग सिकनेस क्या होता है? (What is Sleeping Sickness?)

​यह बीमारी ट्रिपैनोसोमा ब्रूसी (Trypanosoma brucei) नामक सूक्ष्म परजीवी के कारण होती है। जब एक संक्रमित त्से-त्से मक्खी किसी इंसान को काटती है, तो यह परजीवी रक्त प्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं। समय के साथ, ये परजीवी रक्त से होते हुए केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) और मस्तिष्क तक पहुँच जाते हैं, जिससे नींद का चक्र पूरी तरह बिगड़ जाता है।

​स्लीपिंग सिकनेस के लक्षण (Symptoms of Sleeping Sickness)

​इस बीमारी के लक्षण दो चरणों में विकसित होते हैं:

​प्रथम चरण (Hemolymphatic Phase):

​इस चरण में परजीवी केवल रक्त और लसीका (Lymph) में होते हैं।

  • बुखार और सिरदर्द: बार-बार तेज बुखार आना।
  • जोड़ों में दर्द (Joint Pain): मांसपेशियों और जोड़ों में भारी दर्द।
  • खुजली (Itching): त्वचा पर चकत्ते और खुजली होना।
  • लिम्फ नोड्स में सूजन: विशेषकर गर्दन के पीछे की ग्रंथियों का सूजना।

​द्वितीय चरण (Neurological Phase):

​यह चरण तब शुरू होता है जब परजीवी मस्तिष्क में प्रवेश कर जाते हैं।

  • नींद के चक्र में बदलाव: दिन में बहुत अधिक नींद आना और रात में अनिद्रा (Insomnia)। यही इस बीमारी का सबसे प्रमुख लक्षण है।
  • मानसिक भ्रम (Confusion): सोचने-समझने की शक्ति कम होना।
  • व्यवहार में बदलाव: चिड़चिड़ापन या आक्रामकता।
  • समन्वय की कमी: चलने-फिरने और संतुलन बनाने में कठिनाई।

​स्लीपिंग सिकनेस के कारण (Causes of Sleeping Sickness)

  • त्से-त्से मक्खी (Tsetse Fly): यह इस बीमारी का मुख्य वाहक है। यह मक्खी संक्रमित जानवरों या मनुष्यों का खून पीकर परजीवी को एक से दूसरे में फैलाती है।
  • माँ से बच्चे में: गर्भावस्था के दौरान संक्रमित माँ से भ्रूण को यह बीमारी हो सकती है।
  • दूषित सुई: संक्रमित सुई के दोबारा इस्तेमाल से।

​कैसे पहचानें? (How to Identify/Diagnosis?)

​इस बीमारी का निदान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। डॉक्टर निम्नलिखित जांच करते हैं:

  • रक्त परीक्षण (Blood Test): रक्त में परजीवी की उपस्थिति देखने के लिए।
  • लिम्फ नोड एस्पिरेशन: सूजी हुई ग्रंथियों से तरल पदार्थ लेकर जांच करना।
  • लम्बर पंक्चर (Lumbar Puncture): रीढ़ की हड्डी से तरल (CSF) निकालकर यह देखना कि संक्रमण मस्तिष्क तक पहुँचा है या नहीं।

​इलाज (Treatment of Sleeping Sickness)

​इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी किस चरण में है:

  • दवाएं (Medications): शुरुआती चरण में 'पेंटामिडाइन' (Pentamidine) या 'सुरमिन' (Suramin) जैसी दवाएं दी जाती हैं।
  • मस्तिष्क चरण का इलाज: यदि परजीवी मस्तिष्क तक पहुँच गए हैं, तो 'मेलार्सोप्रोल' (Melarsoprol) या 'एफ्लोरनिथिन' (Eflornithine) का उपयोग किया जाता है।
  • नई दवा: हाल के वर्षों में 'फेक्सिनिडाजोल' (Fexinidazole) नामक एक नई मौखिक दवा विकसित की गई है जो दोनों चरणों में प्रभावी हो सकती है।

​बचाव के उपाय (Prevention)

​चूंकि इसके लिए कोई टीका (Vaccine) उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही एकमात्र रास्ता है:

  • सुरक्षात्मक कपड़े: लंबी आस्तीन वाली शर्ट और लंबी पैंट पहनें।
  • रंगों का चयन: त्से-त्से मक्खियां गहरे और चमकीले रंगों (विशेषकर नीले) की ओर आकर्षित होती हैं, इसलिए हल्के और मध्यम रंग के कपड़े पहनें।
  • मच्छरदानी और रिपेलेंट्स: सोते समय कीटनाशक उपचारित मच्छरदानी का उपयोग करें।
  • झाड़ियों से बचें: दिन के समय झाड़ियों वाले इलाकों में जाने से बचें जहाँ ये मक्खियां आराम करती हैं।

​अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या स्लीपिंग सिकनेस भारत में पाया जाता है?

नहीं, यह मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों तक सीमित है। हालांकि, वहां से आने वाले यात्रियों में इसके मामले देखे जा सकते हैं।

2. क्या यह बीमारी जानलेवा है?

हाँ, बिना इलाज के यह बीमारी शत-प्रतिशत जानलेवा है।

3. क्या यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में छूने से फैलती है?

नहीं, यह सीधे संपर्क या छूने से नहीं फैलती। यह केवल मक्खी के काटने या रक्त के संपर्क से फैलती है।

​निष्कर्ष (Conclusion)

​स्लीपिंग सिकनेस एक जटिल बीमारी है जो मुख्य रूप से गरीब और ग्रामीण आबादी को प्रभावित करती है। इसकी शुरुआती पहचान ही जीवन बचा सकती है। यदि आप किसी ऐसे क्षेत्र की यात्रा से लौटे हैं जहाँ यह बीमारी आम है और आप लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

​क्या आप अन्य उष्णकटिबंधीय बीमारियों (Tropical Diseases) जैसे मलेरिया या डेंगू के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहेंगे?

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