गाउट (Gout) जिसे हिंदी में कभी-कभी “अम्लीय गठिया” कहा जाता है, एक ऐसा रोग है जिसमें खून में यूरिक एसिड (uric acid) की मात्रा बहुत बढ़ जाती है और वह यूरिक एसिड क्रिस्टल्स के रूप में जोड़ों (joints) में जमा होकर तीव्र दर्द, सूजन एवं लालिमा उत्पन्न करती है।
जब यह स्थिति किशोरों (आमतौर पर उम्र लगभग १०-१८ वर्ष) या युवा अवस्था में होती है, तो इसे “किशोर गाउट” अर्थात Juvenile Gout कहा जा सकता है। हालाँकि यह बहुत ही विरल है।
यह ब्लॉग किशोर युग में गाउट के कारण-लक्षण, रोकथाम, घरेलू उपाय एवं सावधानियों सहित सम्पूर्ण जानकारी देगा।

किशोर गाउट में निम्नलिखित अवस्थाएँ शामिल हो सकती हैं:
- खून में यूरिक एसिड (uric acid) का स्तर असाधारण रूप से बढ़ जाना (hyperuricemia)।
- यूरिक एसिड द्वारा मोनोसोडियम युरेट क्रिस्टल्स (monosodium urate crystals) का बने रहना और वे क्रिस्टल्स जोड़ों के आसपास जमा हो जाना।
- इन क्रिस्टल्स के कारण जोड़ों में अचानक एवं तीव्र सूजन, दर्द और लालिमा आना।
- किशोरावस्था में यह सामान्य गाउट के मुकाबले अधिक दुर्लभ है, और अक्सर इसमें कुछ अन्य रोग-स्थितियाँ (underlying conditions) मौजूद होती हैं।
- कभी-कभी इसे “परिवारगत किशोर हाइपरयूरिसेमिक नेफ्रॉपैथी” (Familial Juvenile Hyperuricemic Nephropathy) जैसे जीन-विकृति (genetic) रोगों के अंतर्गत देखा जाता है, जिसमें यकृत, गुर्दी / किडनी संबंधित समस्या हो सकती है।
इस प्रकार, किशोर गाउट सिर्फ “वयस्क गाउट का छोटा रूप” नहीं है — इसके पीछे अन्य जोखिम-कारक और जीन-प्रभावित कारण हो सकते हैं।
Juvenile Gout कारण (Causes)
किशोर गाउट के कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:
- हाइपरयूरिसेमिया (Hyperuricemia) – जब खून में यूरिक एसिड अधिक हो जाती है और वह पर्याप्त रूप से यूरिन द्वारा निकल नहीं पाती।
- गुर्दी-सम्बन्धी रोग (Kidney disease or reduced excretion) – जैसे कि गुर्दियों की काम करने की क्षमता कम होना, जिससे यूरिक एसिड निकल नहीं पाती।
- अनुवांशिक (Genetic) कारण – उदाहरण के लिए Familial Juvenile Hyperuricemic Nephropathy जैसी जीन-बीमारियों में किशोरावस्था में गाउट हो सकता है।
- बहुत कम उम्र में गाउट को ट्रिगर करने वाले अन्य रोग-स्थितियाँ – जैसे कि गुर्दी खराबी, मेटाबॉलिक विकार, कुछ ऑरफन रोग (rare diseases) आदि।
- जीवनशैली-कारक (Lifestyle factors) – हालांकि किशोरों में वयस्कों जितने नियमित नहीं, लेकिन मोटापा (obesity), निष्क्रिय जीवनशैली, आहार में उच्च स्यूरिन (purine)-युक्त खाने-पीने की आदतें जोखिम बढ़ा सकती हैं।
Juvenile Gout लक्षण (Symptoms of Juvenile Gout)
किशोर गाउट में निम्न-लिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- अचानक-से बहुत तीव्र दर्द किसी एक जोड़ में (अक्सर अंगुली का पहला जोड़ या पैरों का अंगूठा) — जैसे अचानक दर्द उठना।
- जोड़ का (affected joint) सूजन, गर्म-हवास, लालिमा और अत्यधिक संवेदनशीलता।
- सूजन के बाद कुछ-दिनों से कुछ सप्ताह तक हल्की-सी असुविधा बनी रह सकती है।
- जोड़ों का गतिसमय (range of motion) में कमी-आना, यानी चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है।
- यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो त्वचा के नीचे टॉफी (tophi) नामक यूरिक क्रिस्टल जमा-स्थान बन सकते हैं (हालाँकि किशोरों में यह बहुत कम होता है)।
“Gout usually starts in the big toe, but it can also affect other joints … in children and teenagers it is very rare.”
Juvenile Gout कैसे पहचाने (How to Recognize / Diagnosis)
किशोर गाउट की पहचान और निदान के लिए ध्यान देने योग्य बातें:
- जब किशोर में अचानक जोड़ में तीव्र दर्द-सूजन हो, विशेषकर पहले अंगूठे (big toe) के जोड़ में, तो गाउट का विचार करना चाहिए।
- खून (blood) में यूरिक एसिड का स्तर मापना (उच्च स्तर होना) — हालांकि यह-ही पर्याप्त नहीं होता।
- जोड़ से सायनोविअल द्रव (synovial fluid) निकालकर उसमें यूरिक क्रिस्टल्स की पुष्टि करना — यह निदान का “गोल्ड-स्टैंडर्ड” तरीका है।
- गुर्दी-कार्य (kidney function) परीक्षण करना क्योंकि किशोर गाउट में अक्सर गुर्दी समस्या पाई जाती है।
- पारिवारिक इतिहास (family history) लेना कि क्या घर में गाउट या गुर्दी-रोग हुआ है।
- अन्य возможित कारणों (जैसे: जोड़ों का अन्य प्रकार का गठिया) को अलग करना — उदाहरण के लिए Juvenile Idiopathic Arthritis (JIA) से।
रोकथाम (Prevention)
किशोर गाउट को रोकने के लिए नीचे दिए उपाय मदद-गार हो सकते हैं:
- स्वस्थ आहार: स्यूरिन-युक्त खाद्य पदार्थों (जैसे ज़्यादा रेड मीट, जीव जंतु, समुंद्री भोजन) को ऑक्शन में रखना।
- पर्याप्त जलपान: खूब पानी पीना ताकि यूरिक एसिड अच्छी तरह बाहर निकल सके।
- वजन नियंत्रण: अतिरिक्त वजन यूरिक एसिड को बढ़ावा देता है, इसलिए स्वस्थ शरीर-भार बनाए रखना।
- नियमित शारीरिक गतिविधि: सक्रिय जीवनशैली अपनाना।
- गुर्दी-स्वास्थ्य पर ध्यान: गुर्दी ठीक से काम करेगी तो यूरिक एसिड ठीक से बह सकेगी।
- रक्तचाप, शुगर, ब्लड फैट्स व अन्य रोगों का नियंत्रण: क्योंकि ये भी गाउट की संभावना बढ़ा सकते हैं।
Juvenile Gout इलाज (Treatment)
किशोर गाउट के इलाज में निम्न-लिखित शामिल होते हैं:
- तीव्र जोड़ के दर्द-सूजन के लिए गैर-स्टेरॉइडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाएँ (NSAIDs), कोल्चिसीन (colchicine) आदि।
- यूरिक एसिड को कम करने वाली दवाएँ जैसे Allopurinol, Febuxostat आदि — विशेष रूप से यदि क्रॉनिक/दोहराती स्थिति हो।
- underlying रोचक कारणों (जैसे गुर्दी-रोग या जीन-विकृति) का इलाज। उदाहरण के लिए, एक अध्ययन में किशोरों में गुर्दी-रोग-संबंधित गाउट में Allopurinol प्रभावी पाया गया।
- जीवनशैली-परिवर्तन (उपरोक्त रोकथाम वाले उपाय) का पालन।
- नियमित मेडिकल फॉलो-अप: खासकर यदि गुर्दी-सम्बन्धी समस्या हो।
घरेलू उपाय (Home Remedies)
उपचार के साथ-साथ नीचे कुछ घरेलू उपाय मदद कर सकते हैं (लेकिन डॉक्टर की सलाह के विकल्प नहीं!)
- चिल्ड/ठंडी सिकाई (cold pack) — दर्द वाले जोड़ पर कुछ समय के लिए ठंडी पट्टी।
- हल्के स्ट्रेचिंग एवं जोड़े को आराम देना — तीव्र चरण में भारी गतिविधि नहीं करनी चाहिए।
- आहार में ज्यादा फल-सब्जियाँ, कम लाल मीट, कम प्रोसेस्ड फूड।
- खूब पानी पीना (दिन में कम-से-कम 2-3 लीटर या चिकित्सक की सलाह अनुसार) ताकि यूरिक एसिड निकले।
- शराब एवं उच्च-शुगरयुक्त पेय से बचना — हालांकि किशोरों में यह सामान्यतः कम होता है, पर भविष्य के लिए अच्छा अभ्यास है।
- यदि संभव हो, मसालेदार भोजन, अत्यधिक मीठा या फैटी भोजन कम करना।
सावधानियाँ (Precautions)
- किशोर उम्र में गाउट बहुत ही विरल है — अगर किसी किशोर में गाउट जैसा लक्षण दिखे तो जल्दी डॉक्टर से दिखाना आवश्यक है।
- किसी भी दवा को स्वयं-से न लेना, विशेष रूप से यूरिक एसिड-कम करने वाली दवाएँ। हमेशा रीम्योलॉजिस्ट/नेफ्रोलॉजिस्ट की सलाह।
- जोड़ों के दर्द-सूजन को हल्के अंदाज़ में न लेना क्योंकि यदि समय रहते इलाज न हो तो गुर्दी-और जोड़ों का दीर्घकालीन नुकसान हो सकता है।
- आहार-परिवर्तन करते समय पोषण की कमी न होने दें — किशोरों में विकास जारी रहता है, इसलिए आहार संतुलित होना चाहिए।
- किसी अन्य रोग-स्थिति (जैसे गुर्दी का समस्या, आनुवंशिक रोग) मौजूद हो सकती है — डॉक्टर को पूरी जानकारी दें।
- नियमित रूप से यूरिक एसिड स्तर, गुर्दी-कार्य परीक्षण, अन्य जॉइंट-स्थिति परीक्षण कराना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या केवल किशोरों को गाउट हो सकता है?
उत्तर: आम तौर पर गाउट वयस्कों में अधिक पाया जाता है, किशोरों में बहुत कम और अक्सर अन्य कारणों (जैसे गुर्दी-रोग, जीन निरुपण) से जुड़ा होता है।
प्रश्न 2: क्या गाउट पूरी तरह ठीक हो सकता है?
उत्तर: यदि समय रहते पहचान हो जाए और उपयुक्त उपचार एवं जीवनशैली-परिवर्तन हो जाएँ, तो कई बार जोड़ों के दर्द-मुकामल रूप से नियंत्रित हो सकते हैं। लेकिन जीन-कारण या गुर्दी-सम्बन्धी स्थितियों में दीर्घ-कालीन नियंत्रण ज़रूरी है।
प्रश्न 3: किस तरह का आहार गाउट के लिए अच्छा नहीं है?
उत्तर: लाल मीट, आंत / अंग (organ meat), समुन्द्री जीव (shellfish), बहुत ज्यादा शराब एवं शर्करा युक्त पेय (sugar-sweetened beverages) आदि यूरिक एसिड बढ़ा सकते हैं।
प्रश्न 4: क्या नियमित रूप से यूरिक एसिड बढ़ने से जोड़ों को ही नुकसान होता है?
उत्तर: नहीं — यूरिक एसिड बढ़ने पर क्रिस्टल्स बनने लगते हैं, वो जोड़ों में सूजन और दर्द पैदा कर सकते हैं, यदि untreated रहे तो जोड़ों, टॉफी और गुर्दियों को भी नुकसान हो सकता है।
प्रश्न 5: क्या यह वंशानुगत (hereditary) हो सकता है?
उत्तर: हाँ — किशोर गाउट में कभी-कभी पारिवारिक इतिहास तथा जीन-विकृति (genetic mutations) पाई जाती हैं।
निष्कर्ष
किशोरावस्था में गाउट एक दुर्लभ लेकिन महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या है। यदि समय पर पहचान हो जाए और सही उपचार व जीवनशैली-परिवर्तन अपनाया जाए, तो इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। विशेष रूप से किशोरों में यह ज़रूरी है कि उन्हें आहार-और जीवनशैली-परिवर्तन, नियमित जाँच-और डॉक्टर की सलाह के प्रति जागरूक बनाया जाए। गुर्दी-स्वास्थ्य, यूरिक एसिड स्तर एवं पारिवारिक इतिहास पर ध्यान देना कितना भी महत्वपूर्ण क्यों न हो — शुरुआत में ही सावधानी बेहतर परिणाम देती है।
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