Khushveer Choudhary

Cholangitis: कारण, लक्षण, इलाज और पूरी जानकारी

Cholangitis (कोलैन्जाइटिस) एक गंभीर स्थिति है जिसमें बाइल डक्ट (पित्त नलिकाओं) में संक्रमण या सूजन हो जाती है। यह संक्रमण आमतौर पर तब होता है जब पित्त का प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे बैक्टीरिया अंदर फंस जाते हैं और संक्रमण शुरू हो जाता है। यह यकृत (liver), पित्ताशय और पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। यदि समय पर इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा हो सकता है।

Cholangitis क्या होता है ? (What is Cholangitis?)

Cholangitis, जिसे कभी-कभी Ascending Cholangitis भी कहा जाता है, एक बैक्टीरियल संक्रमण है जो बाइल डक्ट्स (पित्त नलिकाएं) में होता है। यह नलिकाएं यकृत से पित्त को आंतों तक पहुंचाने का कार्य करती हैं। जब ये नलिकाएं ब्लॉक हो जाती हैं (जैसे पथरी, ट्यूमर या स्कार टिशू से), तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

Cholangitis कारण (Causes of Cholangitis):

  1. गॉलब्लैडर स्टोन (Gallstones) – जो पित्त नलिकाओं में फंस जाते हैं
  2. पित्त नलिकाओं की रुकावट (Bile duct obstruction)
  3. ट्यूमर (Tumor) – जैसे कि बाइल डक्ट कैंसर
  4. बाइल डक्ट की चोट या सर्जरी
  5. इन्फ्लेमेटरी रोग – जैसे Primary sclerosing cholangitis
  6. संक्रमण – बैक्टीरिया आमतौर पर आंतों से प्रवेश करते हैं
  7. इम्यून सिस्टम की कमजोरी

Cholangitis के लक्षण (Symptoms of Cholangitis):

  1. तेज बुखार और ठंड लगना (High fever with chills)
  2. पेट के दाईं ऊपरी ओर दर्द (Pain in upper right abdomen)
  3. पीलिया (Jaundice) – त्वचा और आंखें पीली होना
  4. मतली और उल्टी (Nausea and vomiting)
  5. अत्यधिक पसीना आना (Excessive sweating)
  6. कमज़ोरी और थकान (Weakness and fatigue)
  7. बदबूदार मल या गहरे रंग का पेशाब
  8. मानसिक भ्रम (Confusion) – गंभीर संक्रमण में

Charcot's Triad – तीन मुख्य लक्षणों का संयोजन: बुखार, पीलिया और पेट में दर्द – यह कोलैन्जाइटिस की क्लासिक पहचान है।

Cholangitis कैसे पहचाने (Diagnosis of Cholangitis):

  1. ब्लड टेस्ट

    1. WBC काउंट – संक्रमण की पुष्टि के लिए
    1. बिलीरुबिन, ALP, AST, ALT – लिवर फंक्शन चेक करने के लिए
  2. अल्ट्रासाउंड या CT स्कैन – पित्त की रुकावट या पथरी की पहचान

  3. MRCP (Magnetic Resonance Cholangiopancreatography) – बाइल डक्ट की साफ छवि

  4. ERCP (Endoscopic Retrograde Cholangiopancreatography) – डक्ट में रुकावट की पहचान और इलाज भी

Cholangitis इलाज (Treatment of Cholangitis):

  1. IV एंटीबायोटिक्स – संक्रमण के नियंत्रण के लिए
  2. ERCP द्वारा बाइल डक्ट की सफाई या स्टेंटिंग
  3. बाइल डक्ट में फंसी पथरी को निकालना
  4. सर्जरी – गंभीर मामलों में
  5. इंट्रावेनस फ्लूइड्स और सपोर्टिव केयर – शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने के लिए
  6. हॉस्पिटल में भर्ती आवश्यक होती है – यह इमरजेंसी स्थिति मानी जाती है

Cholangitis कैसे रोके (Prevention of Cholangitis):

  1. गॉलब्लैडर स्टोन का समय रहते इलाज कराएं
  2. पित्ताशय या लिवर की समस्याओं को अनदेखा न करें
  3. यदि पहले ERCP या बाइल डक्ट सर्जरी हुई हो तो नियमित जांच कराएं
  4. संक्रमण के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
  5. पाचन तंत्र की स्वच्छता और हाइजीन बनाए रखें

घरेलू उपाय (Home Remedies) – सिर्फ सहायक रूप में:

नोट: Cholangitis एक मेडिकल इमरजेंसी है, इसका इलाज केवल डॉक्टर द्वारा किया जाना चाहिए। घरेलू उपाय केवल रिकवरी में सहायक हो सकते हैं:

  1. हल्का और सुपाच्य भोजन लें
  2. नींबू पानी या नारियल पानी से हाइड्रेटेड रहें
  3. हल्दी और अदरक युक्त गर्म पानी
  4. भोजन में हल्की मात्रा में घी या तेल
  5. धूम्रपान और शराब से दूर रहें

सावधानियाँ (Precautions):

  1. बुखार, पेट दर्द और पीलिया को नजरअंदाज न करें
  2. बार-बार गॉलब्लैडर पथरी की शिकायत हो तो इलाज कराएं
  3. पहले से लिवर रोग है तो डॉक्टर की नियमित जांच कराएं
  4. खुद से कोई एंटीबायोटिक न लें
  5. घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहकर ERCP या सर्जरी को टालें नहीं

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

Q1. क्या Cholangitis जानलेवा हो सकता है?
हाँ, अगर समय पर इलाज न मिले तो यह लिवर फेलियर या सेप्सिस का कारण बन सकता है।

Q2. क्या कोलैन्जाइटिस और पीलिया एक ही हैं?
नहीं, पीलिया इसका एक लक्षण हो सकता है, लेकिन कोलैन्जाइटिस एक संक्रमण है।

Q3. क्या यह बार-बार हो सकता है?
अगर मूल कारण जैसे पथरी या बाइल डक्ट की रुकावट ठीक न की जाए, तो यह दोबारा हो सकता है।

Q4. क्या घर पर इसका इलाज संभव है?
नहीं, यह एक आपातकालीन स्थिति है और अस्पताल में भर्ती होकर इलाज आवश्यक है।

निष्कर्ष (Conclusion):

Cholangitis (कोलैन्जाइटिस) एक गंभीर पित्त नलिका संक्रमण है जो तुरंत इलाज मांगता है। यदि समय पर पहचाना जाए तो एंटीबायोटिक्स और ERCP जैसे तरीकों से इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। इसलिए सतर्क रहें, समय पर जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह पर पूरा इलाज लें।


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