गर्भावस्था एक महिला के जीवन का महत्वपूर्ण चरण होता है, जिसमें शरीर में कई तरह के हार्मोनल परिवर्तन होते हैं। हाइपरथायरॉइडिज़्म (Hyperthyroidism) एक ऐसी स्थिति है जिसमें थायरॉयड ग्रंथि अधिक मात्रा में थायरॉयड हार्मोन (Thyroxine – T4 और Triiodothyronine – T3) का उत्पादन करती है। गर्भावस्था के दौरान यह समस्या जटिलताएँ बढ़ा सकती है जैसे – प्रीमैच्योर डिलीवरी, भ्रूण की वृद्धि पर असर, प्रीक्लेम्पसिया, और गर्भपात का खतरा।
हाइपरथायरॉइडिज़्म क्या होता है (What is Hyperthyroidism in Pregnancy?)
हाइपरथायरॉइडिज़्म में महिला का मेटाबॉलिज़्म (Metabolism) तेज़ हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान जब शरीर को पहले से ही अधिक पोषण और ऊर्जा की आवश्यकता होती है, ऐसे समय में यह स्थिति माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
हाइपरथायरॉइडिज़्म कारण (Causes of Hyperthyroidism in Pregnancy)
गर्भावस्था में हाइपरथायरॉइडिज़्म होने के मुख्य कारण –
- ग्रेव्स डिज़ीज़ (Graves’ Disease) – यह सबसे आम कारण है जिसमें इम्यून सिस्टम थायरॉयड को अधिक हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करता है।
- थायरॉयड नोड्यूल्स (Thyroid Nodules) – थायरॉयड ग्रंथि में गांठें बनने से अधिक हार्मोन का उत्पादन होता है।
- मोलर प्रेग्नेंसी (Molar Pregnancy) – असामान्य गर्भधारण जिसमें hCG हार्मोन असामान्य रूप से अधिक बनता है।
- परिवारिक इतिहास (Family History) – यदि परिवार में थायरॉयड रोग रहा है तो संभावना अधिक होती है।
- अत्यधिक आयोडीन सेवन (Excess Iodine Intake) – बहुत अधिक आयोडीन का सेवन भी हाइपरथायरॉइडिज़्म को ट्रिगर कर सकता है।
हाइपरथायरॉइडिज़्म के लक्षण (Symptoms of Hyperthyroidism in Pregnancy)
गर्भावस्था में हाइपरथायरॉइडिज़्म के लक्षण सामान्य गर्भावस्था की तकलीफों से मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन इनमें कुछ विशेष संकेत होते हैं –
- हृदय गति तेज़ होना (Fast heartbeat)
- पसीना अधिक आना (Excessive sweating)
- अचानक वजन कम होना (Unexplained weight loss)
- हाथों में कंपकंपी (Tremors in hands)
- बेचैनी और चिंता (Anxiety and nervousness)
- बार-बार भूख लगना (Increased appetite)
- नींद की कमी (Insomnia)
- थकान और कमजोरी (Fatigue and weakness)
- आंखों का बाहर निकलना या सूजन (Bulging eyes – विशेषकर Graves’ Disease में)
हाइपरथायरॉइडिज़्म कैसे पहचाने (Diagnosis of Hyperthyroidism in Pregnancy)
- ब्लड टेस्ट (Blood Tests) – TSH (Thyroid Stimulating Hormone), T3 और T4 की जाँच।
- थायरॉयड एंटीबॉडी टेस्ट (Thyroid Antibody Test) – Graves’ Disease की पुष्टि के लिए।
- अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) – भ्रूण के विकास पर असर की जांच।
- क्लिनिकल लक्षणों का मूल्यांकन (Clinical Examination) – डॉक्टर द्वारा शारीरिक लक्षणों की जाँच।
हाइपरथायरॉइडिज़्म इलाज (Treatment of Hyperthyroidism in Pregnancy)
गर्भावस्था में हाइपरथायरॉइडिज़्म का इलाज सावधानी से किया जाता है ताकि माँ और बच्चे दोनों को नुकसान न हो।
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दवाइयाँ (Medications)
- एंटी-थायरॉयड ड्रग्स (जैसे Propylthiouracil (PTU) पहली तिमाही में, और Methimazole दूसरी-तीसरी तिमाही में)।
- बीटा ब्लॉकर्स (हृदय गति नियंत्रित करने के लिए, सीमित समय तक)।
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सर्जरी (Surgery)
- यदि दवाओं से नियंत्रण नहीं होता तो दूसरी तिमाही में थायरॉयड सर्जरी की जा सकती है।
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रेडियोआयोडीन थेरेपी (Radioactive Iodine Therapy)
- गर्भावस्था में यह पूरी तरह से निषिद्ध है क्योंकि यह भ्रूण को नुकसान पहुँचाता है।
हाइपरथायरॉइडिज़्म कैसे रोके (Prevention of Hyperthyroidism in Pregnancy)
- गर्भधारण से पहले थायरॉयड जाँच करवाना।
- संतुलित मात्रा में आयोडीन लेना।
- परिवारिक इतिहास होने पर नियमित जाँच।
- गर्भावस्था में नियमित थायरॉयड टेस्ट कराना।
घरेलू उपाय (Home Remedies for Hyperthyroidism in Pregnancy)
ध्यान रखें कि घरेलू उपाय केवल सपोर्ट के लिए हैं, इलाज का विकल्प नहीं –
- योग और प्राणायाम – तनाव और चिंता कम करने के लिए।
- संतुलित आहार – हरी सब्जियाँ, फल और प्रोटीन से भरपूर भोजन।
- कैफीन कम करना – चाय, कॉफी और सॉफ्ट ड्रिंक कम लें।
- पर्याप्त नींद – रोज़ कम से कम 7–8 घंटे सोना।
- हल्का व्यायाम – जैसे वॉकिंग, डॉक्टर की सलाह से।
सावधानियाँ (Precautions)
- दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह के बिना न बदलें।
- स्वयं से आयोडीन सप्लीमेंट न लें।
- गर्भावस्था के हर चरण में थायरॉयड की नियमित जाँच करवाएँ।
- बच्चे की धड़कन और विकास की अल्ट्रासाउंड से निगरानी कराएँ।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. क्या गर्भावस्था में हाइपरथायरॉइडिज़्म से बच्चा प्रभावित हो सकता है?
हाँ, यदि यह नियंत्रित न किया जाए तो बच्चे में कम वजन, समय से पहले जन्म और थायरॉयड की समस्या हो सकती है।
Q2. क्या यह बीमारी स्थायी है?
नहीं, कई मामलों में डिलीवरी के बाद हाइपरथायरॉइडिज़्म अपने आप कम हो सकता है, लेकिन Graves’ Disease स्थायी रह सकती है।
Q3. क्या स्तनपान के दौरान दवा ली जा सकती है?
हाँ, कुछ दवाएँ सुरक्षित होती हैं, लेकिन डॉक्टर की निगरानी आवश्यक है।
Q4. क्या यह गर्भपात का कारण बन सकता है?
हाँ, यदि इलाज न किया जाए तो गर्भपात और प्रीक्लेम्पसिया का खतरा बढ़ सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
गर्भावस्था में हाइपरथायरॉइडिज़्म एक गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली स्थिति है। सही समय पर जाँच, उचित इलाज और डॉक्टर की सलाह से माँ और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रखा जा सकता है। गर्भवती महिलाओं को चाहिए कि वे अपने थायरॉयड स्तर की नियमित जाँच करवाएँ और किसी भी लक्षण को अनदेखा न करें।
