लैरिंगोट्रेकाइटिस (Laryngotracheitis) एक श्वसन संक्रमण (respiratory infection) है जो स्वरयंत्र (larynx) और श्वासनली (trachea) को प्रभावित करता है।
यह संक्रमण आमतौर पर वायरल (viral) होता है और बच्चों में अधिक सामान्य पाया जाता है, विशेष रूप से 6 महीने से 3 वर्ष की आयु के बीच।
इस स्थिति में गले में सूजन, आवाज़ में भारीपन और साँस लेने में कठिनाई होती है। इसे आम भाषा में "कूप (Croup)" भी कहा जाता है।

लैरिंगोट्रेकाइटिस क्या होता है (What is Laryngotracheitis)

लैरिंगोट्रेकाइटिस में स्वरयंत्र और ट्रेकिया की झिल्ली में सूजन (inflammation) हो जाती है, जिससे वायु मार्ग संकीर्ण हो जाता है।
इसके परिणामस्वरूप बच्चे को भौंकने जैसी खाँसी (barking cough), घरघराहट (stridor) और साँस में तकलीफ होती है।
यह संक्रमण प्रायः पैराइनफ्लुएंजा वायरस (Parainfluenza virus) से होता है, लेकिन अन्य वायरस भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
लैरिंगोट्रेकाइटिस कारण (Causes of Laryngotracheitis)
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वायरल संक्रमण:
- पैराइनफ्लुएंजा वायरस (Parainfluenza virus)
- इन्फ्लुएंजा वायरस (Influenza virus)
- रेस्पिरेटरी सिंशियल वायरस (RSV)
- एडेनोवायरस (Adenovirus)
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बैक्टीरियल संक्रमण:
- स्टैफिलोकोकस ऑरियस (Staphylococcus aureus)
- स्ट्रेप्टोकोकस (Streptococcus)
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अन्य कारण:
- सर्द मौसम
- धूल, धुआँ या प्रदूषण का संपर्क
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
लैरिंगोट्रेकाइटिस लक्षण (Symptoms of Laryngotracheitis)
- भौंकने जैसी खाँसी (Barking cough)
- आवाज़ बैठना (Hoarseness of voice)
- साँस लेने में कठिनाई (Difficulty breathing)
- घरघराहट (Stridor)
- गले में दर्द या जलन
- बुखार (Fever)
- थकान और बेचैनी
- रात के समय लक्षणों का बढ़ना
लैरिंगोट्रेकाइटिस कैसे पहचाने (Diagnosis / Identification)
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शारीरिक जाँच (Physical Examination):
डॉक्टर बच्चे की साँस की आवाज़, गले की सूजन और खाँसी के प्रकार की जांच करते हैं। -
लैरिंगोस्कोपी (Laryngoscopy):
गले और स्वरयंत्र के अंदर की सूजन को देखने के लिए। -
एक्स-रे (X-ray):
ट्रेकिया में "Steeple sign" (शंकु जैसा आकार) देखा जा सकता है। -
वायरल कल्चर या PCR टेस्ट:
संक्रमण के कारण बनने वाले वायरस की पहचान के लिए।
लैरिंगोट्रेकाइटिस इलाज (Treatment of Laryngotracheitis)
1. हल्के मामलों में:
- भाप लेना (Steam inhalation): गले की सूजन और साँस में राहत देता है।
- गुनगुने तरल पदार्थ: जैसे सूप या गर्म पानी।
- आराम: शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
2. मध्यम से गंभीर मामलों में:
- कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (Corticosteroids): जैसे डेक्सामेथासोन या बुडेसोनाइड सूजन कम करने के लिए।
- नेबुलाइज़ेशन (Nebulization): एपिनेफ्रिन (Epinephrine) से वायुमार्ग खुला रखने के लिए।
- ऑक्सीजन थेरेपी: ऑक्सीजन की कमी होने पर दी जाती है।
- एंटीबायोटिक्स: केवल बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि होने पर।
3. अस्पताल में भर्ती की स्थिति:
- यदि बच्चे को साँस लेने में अत्यधिक कठिनाई हो
- त्वचा या होंठ नीले पड़ जाएँ
- लगातार उच्च बुखार रहे
घरेलू उपाय (Home Remedies)
- कमरे की हवा नम रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें।
- बच्चे को पर्याप्त तरल पदार्थ दें।
- गले में ठंडे पेय या आइसक्रीम से परहेज करें।
- आरामदायक वातावरण बनाएँ ताकि बच्चा शांत रह सके।
- धूम्रपान या धूल से बच्चे को दूर रखें।
सावधानियाँ (Precautions)
- संक्रमण के दौरान बच्चे को भीड़ या सार्वजनिक स्थानों से दूर रखें।
- बच्चे को पर्याप्त नींद और आराम दें।
- बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
- बच्चों में फ्लू और अन्य वायरस से बचाव के लिए टीकाकरण करवाएँ।
लैरिंगोट्रेकाइटिस कैसे रोके (Prevention)
- टीकाकरण (Vaccination): इन्फ्लुएंजा और अन्य वायरल संक्रमण से बचाव करता है।
- स्वच्छता बनाए रखें।
- संक्रमित व्यक्ति से दूरी रखें।
- मौसम में बदलाव के दौरान बच्चे को ठंड से बचाएँ।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न 1: क्या लैरिंगोट्रेकाइटिस खतरनाक है?
उत्तर: अधिकांश मामलों में यह हल्का होता है और कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन गंभीर मामलों में साँस रुकने जैसी स्थिति हो सकती है, इसलिए सावधानी आवश्यक है।
प्रश्न 2: क्या यह बच्चों में अधिक होता है?
उत्तर: हाँ, क्योंकि बच्चों का वायुमार्ग छोटा और संवेदनशील होता है।
प्रश्न 3: क्या लैरिंगोट्रेकाइटिस संक्रामक है?
उत्तर: हाँ, यह वायरस या बैक्टीरिया से होता है जो हवा या संपर्क से फैल सकता है।
प्रश्न 4: क्या घर पर इसका इलाज संभव है?
उत्तर: हल्के मामलों में हाँ, लेकिन साँस की गंभीर तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion)
लैरिंगोट्रेकाइटिस एक सामान्य लेकिन कभी-कभी गंभीर श्वसन संक्रमण है जो मुख्यतः बच्चों को प्रभावित करता है।
सही पहचान, शीघ्र उपचार और सावधानियों के माध्यम से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे की साँस की आवाज़, खाँसी या आवाज़ में बदलाव को नज़रअंदाज़ न करें और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।